दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की नई पहल, 50 फीसदी कैब होंगे इलेक्ट्रिक
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार एक नया कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने दिल्ली में संचालित कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वाहनों के बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों शामिल करने का निर्देश दिया है। दिल्ली सरकार की एक सूचना के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मार्च 2023 तक सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने टू-व्हीलर वाहनों के बेड़े में 50 फीसदी और फोर-व्हीलर वाहनों के बेड़े में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना अनिवार्य होगा।

दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा है कि यह निर्णय एग्रीगेटर उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 60 दिनों तक आपत्तियों का मूल्यांकन करेगी, जिसके बाद बाद अधिसूचना जारी की जाएगी।

एग्रीगेटर्स नीति के मसौदे के अनुसार, अंतिम नीति की अधिसूचना के तीन महीने के भीतर नए दोपहिया वाहनों में से 10 प्रतिशत और नए चार पहिया वाहनों के 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन चलाना अनिवार्य होगा। इसके बाद, सभी नए दोपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत और सभी नए चार पहिया वाहनों में से 25 प्रतिशत को मार्च 2023 तक इलेक्ट्रिक होना आवश्यक होगा।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने पहले ही दिल्ली में सभी वाणिज्यिक वाहन मालिकों से 2023 तक अपने आधे बेड़े को इलेक्ट्रिक में बदलने का आग्रह किया था। मंत्री ने वाणिज्यिक वाहन मालिकों से 2025 तक 'स्विच दिल्ली' अभियान के तहत पारंपरिक वाहनों को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े में बदलने का भी आग्रह किया था।

बता दें कि दिल्ली परिवहन विभाग ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल दिल्ली में 1 लाख से ज्यादा पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया। राज्य में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 2016 में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। वर्तमान में दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को एनओसी नहीं दिया जा रहा है लेकिन सरकार उन्हें अन्य राज्यों में चलाने के लिए एनओसी दे रही है जहां ऐसे वाहन प्रतिबंधित नहीं है।

दिल्ली सरकार पेट्रोल-डीजल पर चलने वाले पुराने वाहनों में इलेक्ट्रिक किट लगवाने की भी मंजूरी दे रही है। पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक किट के रेट्रोफिटमेंट की अनुमति से राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक और शून्य-उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। दिल्ली परिवहन विभाग उन निर्माताओं को सूचीबद्ध कर रहा है जो पारंपरिक आईसीई (ICE) वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने के लिए इलेक्ट्रिक किट बनाते हैं।

दिल्ली-राज्यक्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। इसमें डीजल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की अहम भूमिका है। डीजल वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद वाहन मालिक दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी और छूट का लाभ उठा सकते हैं।

दिल्ली सरकार ने 1,000 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने अगस्त 2020 में सब्सिडी की मंजूरी दी थी। इस एग्रीमेंट के तहत दिल्ली में 550 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का परमिट दे दिया गया है और अन्य बसों को अगले कुछ महीनों में शुरू किया जाएगा।

दिल्ली सरकार ने राजधानी में 2024 तक 5 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण करने का लक्ष्य रखा है। दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, ऑटोरिक्शा, ई-रिक्शा, और माल गाड़ियों की खरीद पर 30,000 रुपये की छूट दी जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक कार की खरीद पर ग्राहक 1.5 लाख रुपये तक की छूट का लाभ उठा सकते हैं।


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