एक साल में 25 हजार किलोमीटर राजमार्गों का किया जाएगा निर्माण, बजट 2022 में हुई घोषणा
2022 का केंद्रीय बजट सत्र अभी चल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा है कि सरकार देश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को 25,000 किलोमीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह राजमार्ग विस्तार 2022-23 में किया जाएगा। वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत में सड़क नेटवर्क में काफी वृद्धि हुई है।

उन्होंने आंकड़ों को साझा करते हुए कहा कि 2013-14 के बाद से राष्ट्रीय राजमार्गों/सड़कों के निर्माण में लगातार वृद्धि हुई है। 2019-20 में 10,237 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया था, जबकि 2020-21 में 13,327 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 30.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में पिछले साल सितंबर तक 3,824 किमी सड़क का निर्माण किया गया।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि सड़क परिवहन भारत में माल ढुलाई और यात्रियों दोनों के लिए परिवहन के सबसे किफायती और सुविधाजनक साधनों में से एक है। प्रति दिन सड़क निर्माण की सीमा 2019-2020 में 28 किमी प्रति दिन से बढ़कर 2020-21 में 36.5 किमी प्रति दिन हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 30.4 प्रतिशत अधिक है।

देश में 31 मार्च 2019 तक 63.71 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें, ग्रामीण सड़कें और शहरी सड़कें शामिल हैं। यह अमेरिका के 66.45 लाख किमी के सड़कों के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है।

वित्त मंत्री, सीतारमण ने सड़क निर्माण में महत्वपूर्ण वृद्धि का कारण बताते हुए कहा कि 2020-21 में सरकार ने सार्वजनिक व्यय में 29.5 प्रतिशत की वृद्धि की है जिसके कारण सड़क परियोजनाओं में विस्तार के साथ इन्हें पूरा करने की रफ्तार बढ़ी है। मंत्री ने बयान में कहा कि इससे न केवल सड़क निर्माण को बढ़ावा मिला, बल्कि कोरोना महामारी के कठिन समय में रोजगार का भी सृजन हुआ।

बता दें कि देश में 2025 तक राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2 लाख किलोमीटर तक हो जाएगी। भारत में पहले से ही 1.40 लाख किलोमीटर से अधिक का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क है। केंद्र सरकार 2025 तक 2 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का लक्ष्य लेकर चल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे यात्रा के समय और ईंधन लागत में कटौती के अलावा, आर्थिक विकास में भी मदद करते हैं। जानकारी के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता लॉजिस्टिक्स की लागत को जीडीपी के मौजूदा 14-16 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करना है। चीन में यह 8-10 फीसदी और यूरोपीय देशों में 12 फीसदी है। अगर इसे 10-12 फीसदी तक लाया जाता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत अच्छी प्रतिस्पर्धा कर सकता है।

बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने लॉकडाउन के दौरान भी राजमार्गों के निर्माण का काम जारी रखा था। मार्च 2020 से लॉकडाउन के वजह से ट्रैफिक नहीं होने के कारण कई परियोजनों में निर्माण की रफ्तार को बढ़ाने में भी सफलता मिली थी।

इस दौरान एजेंसी ने निर्माण में कुछ रिकॉर्ड उपलब्धियां भी हासिल कीं। पिछले साल, NHAI ने 25.54 किलोमीटर सिंगल लेन सड़क का विकास केवल 18 घंटों में पूरा कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह सड़क NH-52 पर विजयपुर और सोलापुर के बीच फोर-लेन हाईवे पर स्थित है।

एनएचएआई ने पिछले साल फरवरी में एक दिन के भीतर फोर-लेन हाईवे पर सबसे अधिक मात्रा में कंक्रीट डालने का एक और विश्व रिकॉर्ड बनाया था। यह उपलब्धि ठेकेदार पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने हासिल की और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया।


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