महात्मा के कातिल की सवारी

जिस पर चलकर नाथूराम ने महात्मा गांधी की हत्या की थी। 30 जनवरी सन 1948 को जब महात्मा गांधी दिल्ली के बिरला हाउस में एक प्रार्थना सभा में शिरकता कर रहें थे। उस वक्त नाथूराम गोड़से इसी 40 बीएचपी की 1930 की बनी हुयी स्ट्डबकर कार से बिरला हाउस पहुंचा और भरी सभा में महात्मा गांधी को बड़े ही बेरहमी से गोलियों से भून दिया।
इस कार का निर्माण एक भारतीय राजा के आर्डर देने के बाद किया गया था। महात्मा की हत्या के मामले में नाथूराम जेल चला गया और उसकी यह कार एक एंग्लो इंडियन सैनी कालिब द्वारा खरीद ली गयी। सैनी कालिब वाराणसी के एक उधोगपति था उसके बाद उसने इस कार को निलाम कर दिया जिसे बरेली के परवेज जमाल सिद्दकी ने खरीद लिया। तबसे लेकर आज तक यह कार उनके पास है।


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