वाहन में आ रही है समस्या तो सरकार निकालेगी समाधान, ‘व्हीकल रिकॉल पोर्टल’ पर दर्ज करें शिकायत
वाहन कंपनियों द्वारा खराब वाहन बेचे जाने पर अब ग्राहक इसकी शिकायत सरकार से कर सकेंगे। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने हाल ही में 'व्हीकल रिकॉल पोर्टल' शुरू किया है जहां वाहन मालिक अपने वाहन से जुड़ी गड़बड़ी की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वाहन रिकॉल से जुड़ी शिकायतों का समाधान जल्द किया जा सकेगा।

मौजूदा समाया में भारत में वाहन कंपनियां स्वैच्छिक वाहन रिकॉल नीति का पालन करती हैं जिसके तहत वाहन में गड़बड़ी पाए जाने पर कंपनियां गाड़ियों को रिकॉल करती हैं और उन्हें ठीक कर ग्राहक को वापस करती हैं।

हालांकि, कुछ ग्राहकों की शिकायत रहती है कि रिकॉल के बाद भी उनकी गाड़ियां ठीक नहीं हुईं। ऐसे में ग्राहक को आए दिन खराब वाहन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा इन वाहनों के इस्तेमाल से सड़क दुर्घटना की संभावना भी बढ़ जाती है।

नई व्हीकल रिकॉल नीति के तहत अब वाहन मालिक 7 साल के भीतर अपने वाहन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। वाहन मालिकों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर केंद्रीकृत एजेंसी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) जांच करेगी। यह एजेंसी एक निश्चित समय के भीतर वाहनों को ठीक करने या बदलने का निर्देश देगी।

बता दें कि पिछले साल परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट (1988) में संशोधन कर वाहन कंपनियों के लिए रिकॉल से सम्बंधित नए नियम बनाए थे। जिसके अनुसार वाहन में गड़बड़ी पाए जाने पर निर्माताओं को अनिवार्य वाहन रिकॉल जारी करना होगा।

इस कानून के तहत अगर कोई कंपनी खराब गाड़ी को रिकॉल करने से मना करती है या बार-बार नियमों का उल्लंघन करती है तो उस पर 10 लाख से लेकर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। सरकार ने बताया है कि इस फैसले को ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लागू किया जा रहा है।

नए नियम को 1 अप्रैल 2021 से लागू कर दिया गया है। इस नियम को सभी प्रकार के वाहन यानी, टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, फोर-व्हीलर और हल्के व भारी कमर्शियल वाहनों पर लागू किया गया है। सरकार ने यह भी बताया है कि वाहनों को रिकॉल करने का पूरा खर्च कंपनियों को उठाना होगा। अगर 6 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर या 1 लाख से ज्यादा फोर व्हीलर रिकॉल किये जाते हैं तो ग्राहकों को खराब उत्पाद बेचने के जुर्म में कंपनी पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।


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