MiG-21 Crash: एक बार फिर से क्रैश हुआ मिग-21, लगातार हो रहे हादसे
सोमवार की एक बार फिर से MiG-21 राजस्थान में क्रैश हो गया है जिसमें दो लोगों की जान चली गयी। यह सूरतगढ़ से टेक ऑफ हुई थी और यह घटना प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हुई है। हालांकि पायलेट ने इजेक्ट कर लिया था उसे कोई भी चोट नहीं आई।
यह घटना राजस्थान के हनुमानगगढ़ में हुई है। इसमें दो महिलाओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, वे हनुमानगढ़ के बहलोलनगर जिला के रहने वाले थे। खबर है कि इसके अलावा एक और नागरिक को भी चोट आई है। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा चुका है।

MiG-21 के क्रैश की घटनाएं लगातार सामने आ रही है, पिछले साल ही यह खबर सामने आई थी राजस्थान में MiG-21 जलकर राख हो गयी थी और अब यह घटना हुई है। पुरानी घटना बाड़मेर, राजस्थान में हुई थी और इसमें दोनों पायलेट की जान चली गयी थी।
MiG-21 की बात करें तो भारत को इसकी पहली यूनिट मार्च 1963 मिली थी। तब से लेकर भारतीय एयरफोर्स के पास इसकी 874 यूनिट थी। 874 यूनिट में से, 490 यूनिट क्रैश हए नही या फिर किसी तरह के एक्सीडेंट में शामिल रहे हैं।

इन हादसों में अब तक 170 पायलेट की जान जा चुकी है जिस वजह से इसे 'द फ्लाइंग कॉफिन' नाम दिया गया है। भारतीय एयरफोर्स में पहले कुछ MiG-21 शामिल होने के बाद, अब तक इसके चार वैरिएंट लाए जा चुके हैं।
1965 में इसका पहला वैरिएंट MiG-21PF (टाइप 76) लाया गया था। उसके बाद, 1970 में पहली MiG-21एफएल लायी गयी थी जिसका निर्माण एचएलएल (हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड) ने किया था। यह जेट्स 1971 भारत-पकिस्तान युध्द में काम आये थे।

आखिरी MiG-21 बिसन का उत्पादन 38 वर्ष पहले, 1985 में किया गया था। भारतीय एयरफोर्स के पास वर्तमान में इसा फाइटर जेट के कुल 50 यूनिट अभी भी बाकी है। MiG-21 बिसन में लेजर गाइडेड हथियार दिए गये थे जिससे लंबी दूरी स्ट्राइक करना आसान था।
यह उस समय के हिसाब एक बड़ा काम था। पहले MiG को डिफेन्स फाइटर व विजुअल रेंज एक अंदर एयर टू एयर कॉम्बैट के लिए डिजाईन किया गया था। यह इसलिए भी था कि एयरक्राफ्ट लेजर-गाइडेड हथियारों के अनुरूप तैयार नहीं था।
MiG-21 एक क्षमतावान फाइटर जेट है लेकिन यह बहुत से हादसों का कारण भी बन चुका है। 40 साल पुरानी जेट होने की वजह से समय के साथ इसकी बॉडी व फ्रेम भी पुराने व कमजोर हो चुके होंगे। इस वजह से इतने हादसे हो रहे हैं।


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