एसयूवी चालक ने जंगली जानवर को दिया खाना, तो पुलिस ने काटा चालान
आपने वाइल्ड लाइफ सैंक्च्ययूरी या नेशनल पार्क से यात्रा करते समय संकेत देखे होंगे कि पर्यटकों को जंगली जानवरों को खिलाने की अनुमति नहीं है। फिर भी, कुछ लोग इसे इसे नजरअंदाज कर देते हैं और जंगली जानवरों को मजे के लिए या तस्वीरें लेने के लिए खिलाते हैं। हाल ही में कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व से गुजरते हुए महिंद्रा एक्सयूवी500 चालक ने एक जानवर को खाना खिला दिया जिससे उसपर कानूनी कार्रवाई हो गई।

इस व्यक्ति की पहचान एक प्रत्रकार के तौर पर की गई है जो बांदीपुर-ऊटी हाईवे पर अपनी एसयूवी रोक कर एलक हिरन को खाना खिला रहा था। हाईवे पर दूसरी तरफ से आ रहे कुछ लोगों ने जानवर को खाना खिलाते हुए उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया जो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के सामने आते ही कर्नाटक वन विभाग ने संज्ञान में लिया और वाहन की खोजबीन शुरू कर दी।

पुलिस ने कुछ ही देर में गाड़ी को ट्रैक कर अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने वाहन चालक को ऐसी गलती दोबारा न दोहराने की चेतावनी दी और कुछ फाइन लगाने के बाद जाने दिया।

बता दें कि, नेशनल पार्क या सैंक्च्ययूरी के क्षेत्र में जानवरों को खाना देना गैरकानूनी है। अक्सर, लोग ऐसी जगहों से सफर करते समय जानवरों को खाना खिलने या तस्वीर लेने के लिए सड़कों पर गाड़ी रोक देते हैं जिससे जानवर सड़क पर आ जाते हैं और उनकी हादसे का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है।

कई बार खाने की तलाश में जानवर सड़कों पर आ जाते हैं जहां ये तेज रफ्तार गाड़ियों की चपेट में आ जाते हैं। नेशनल पार्क या सैंक्च्ययूरी से आस-पास के हाईवे या सड़कों पर आपको कई ऐसे साइन बोर्ड (सूचना पट्टी) दिख जाएंगे जिसपर सफर करते समय गाड़ी रोककर जानवरों को खाना खिलाने की सख्त मनाही होती हैं।

जंगली जानवरों के व्यवहार का पता लगाना पेचीदा काम है। यदि कोई व्यक्ति सड़क के किनारे किसी जानवर को खाना खिलाता है, तो जानवर उम्मीद करते हैं कि अगला व्यक्ति भी उन्हें खाना खिलाएगा। इससे वे वापस उसी स्थान पर आ जाते हैं। यह जरूरी नहीं है कि अगला व्यक्ति भी उन्हें खिलाए। जानवर सड़क को अवरुद्ध कर सकते हैं और यदि व्यक्ति उन्हें नहीं खिलाता है तो वे आक्रामक भी हो जाते हैं।

जंगली जानवर छोटी-छोटी बातों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। उदाहरण के लिए, इंजन की गड़गड़ाहट या हॉर्न की आवाज से जानवर घबरा जाते हैं। ऐसी कोई भी आवाज या हरकत जिससे वह अनजान होते हैं, उन्हें उत्तेजित कर देती है। ऐसे में जानवर उस गाड़ी पर हमला भी कर सकते है और नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस वजह से जंगलों में सफारी के दौरान वाहनों को अपना इंजन बंद करना पड़ता है क्योंकि जंगली जानवर उन्हें दूर से ही सुन लेते हैं।

आपको याद रखना चाहिए कि आप उनके क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं और यह उनका घर है और वे इसकी रक्षा के लिए कुछ भी करेंगे। यदि आप सड़क पर जानवरों के किसी झुंड से मिलते हैं, तो सड़क के किनारे वाहन पार्क करना और उनके जाने की प्रतीक्षा करना अच्छा होगा। गैंडे और हाथी जैसे जानवर अपने वजन के कारण कार को आसानी से नुकसान पहुंचा सकते हैं।
Source:Starofmysore


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