नोएडा में महिंद्रा थार का रेड लाइट जंप करना पड़ा भारी, वायरल वीडियो देख भड़के लोग
नोएडा में एक महिंद्रा थार के बेधड़क रेड लाइट तोड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख लोग काफी गुस्से में हैं। सामने आए फुटेज के मेटाडेटा के मुताबिक यह वाकया 15 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे का है, हालांकि चौराहे के सटीक नाम का खुलासा नहीं हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों और ई-चालान सिस्टम की मदद से गाड़ी का नंबर ट्रेस कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एसयूवी गाड़ियों के स्टंट और हुड़दंग का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते हफ्ते ही ऐसा एक और मामला सुर्खियों में रहा था। 16 अक्टूबर को पुलिस ने सेक्टर 18 की मल्टीलेवल पार्किंग में थार की छत पर स्टंट करने के आरोप में दिल्ली के दो युवकों को गिरफ्तार कर एसयूवी जब्त कर ली थी। इससे साफ पता चलता है कि नंबर प्लेट की पहचान होते ही नोएडा पुलिस कितनी तेजी से एक्शन ले रही है।

महिंद्रा थार रेड लाइट उल्लंघन: नोएडा में ANPR से ट्रेस हो रही नंबर प्लेट
नोएडा का इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) सेक्टर 94 स्थित कंट्रोल रूम से संचालित होता है। यह शहर भर में लगे एक हजार से भी ज्यादा कैमरों से चलता है, जिनमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) और रेड-लाइट डिटेक्शन कैमरे शामिल हैं। फुटेज की जांच के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से उसका मिलान किया जाता है और फोटो सबूत के साथ ई-चालान काट दिया जाता है। इस सिस्टम ने हाल के एक ही साल में करीब 3 लाख चालान जारी किए हैं।
महिंद्रा थार रेड लाइट मामला: कौन सी धाराएं लगेंगी और कितना होगा जुर्माना?
रेड लाइट जंप करने पर पुलिस दो तरह से कार्रवाई कर सकती है— मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत खतरनाक ड्राइविंग का मामला, या फिर सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 119 (सहपठित धारा 177) के तहत ट्रैफिक सिग्नल के उल्लंघन का केस। अगर मामला ज्यादा गंभीर या खतरनाक पाया जाता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 के तहत लापरवाही से गाड़ी चलाने का मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
| कानूनी प्रावधान | क्या अपराध बनता है | जुर्माने की राशि |
|---|---|---|
| एमवी एक्ट (MVA) धारा 184 | खतरनाक ड्राइविंग, जिसमें रेड लाइट जंप करना शामिल है | पहली बार में ₹1,000 से ₹5,000; एनसीआर में यह आमतौर पर कोर्ट चालान होता है। |
| CMVR 119 + MVA 177 | जरूरी ट्रैफिक संकेतों का उल्लंघन | यूपी में शमनीय (कंपाउंडेबल); पहली बार में ₹100, दोहराने पर ₹200 का प्रावधान। |
| BNS धारा 281 | लापरवाही या तेज गति से गाड़ी चलाना | 6 महीने तक की जेल या ₹1,000 तक जुर्माना, या दोनों। |
धारा 184 के तहत जुर्माने का स्लैब 2019 के संशोधनों की अदालती व्याख्या के आधार पर तय होता है। दिल्ली-एनसीआर में रेड लाइट उल्लंघन (RLVD) के मामलों को ज्यादातर कोर्ट चालान माना जाता है। वहीं, यूपी पुलिस साधारण सिग्नल उल्लंघन के लिए धारा 119/177 के तहत ऑन-द-स्पॉट कम जुर्माना वसूलती है।
एनसीआर में बार-बार नियम तोड़ने वालों पर क्या होगी सख्त कार्रवाई?
सिर्फ भारी जुर्माना ही नहीं, बल्कि गौतमबुद्ध नगर में रेड लाइट जंप करने, ओवरस्पीडिंग या ऐसे ही गंभीर अपराधों पर लगातार तीन चालान कटने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के निर्देशानुसार गंभीर उल्लंघनों के मामलों में कम से कम तीन महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड करने का प्रावधान है।
ई-चालान कैसे चेक करें, भरें या कोर्ट में चुनौती दें?
अपने वाहन का चालान चेक करने के लिए नेशनल ट्रैफिक पोर्टल (eChallan) पर जाएं, चालान की फोटो देखें और ऑनलाइन भुगतान करें। अगर नोटिस पर "sent to court" (कोर्ट भेजा गया) लिखा है, तो वर्चुअल कोर्ट (Virtual Court) की वेबसाइट से इसका ऑनलाइन निपटारा कर सकते हैं। अगर कैमरे से नंबर पढ़ने में कोई गलती हुई है, तो जुर्माना भरने से पहले पोर्टल के हेल्पडेस्क या ITMS की शिकायत प्रणाली के जरिए आपत्ति दर्ज कराएं। चालान जमा करने के बाद रसीद संभालकर जरूर रखें।
ट्रैफिक सिग्नल पर रील बनाने का शौक नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा मायने रखनी चाहिए। नोएडा का आधुनिक कैमरा नेटवर्क और पुलिस का त्वरित एक्शन पहले भी एसयूवी से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियां और भारी ई-चालान कर चुका है। अब पुलिस अवैध मॉडिफाइड लाइट बार और प्रेशर हॉर्न जैसी चीजों पर भी सख्ती से शिकंजा कस रही है। थार का यह वायरल वीडियो एक बार फिर याद दिलाता है कि लाल बत्ती का मतलब रुकना होता है, सोशल मीडिया कंटेंट बनाना नहीं।


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