महाराष्ट्र सरकार लाएगी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति, इन 5 शहरों को होगा फायदा
महाराष्ट्र में नई इलेक्ट्रिक पॉलिसी के लागू होने के बाद 5 शहरों में इसका असर होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार नई इलेक्ट्रिक पॉलिसी मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और औरंगाबाद में लागू करेगी। जिसमें सभी सरकारी विभाग में इलेक्ट्रिक व्हीकल यूज करना अनिवार्य किया जाएगा। वहीं ये पॉलिसी 2022 में केवल 5 शहरों में लागू होगी जिसे बाद इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।

महाराष्ट्र में नई इलेक्ट्रिक पॉलिसी के लागू होने के बाद 5 शहरों में इसका असर होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार नई इलेक्ट्रिक पॉलिसी मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और औरंगाबाद में लागू करेगी। जिसमें सभी सरकारी विभाग में इलेक्ट्रिक व्हीकल यूज करना अनिवार्य किया जाएगा। वहीं ये पॉलिसी 2022 में केवल 5 शहरों में लागू होगी जिसे बाद इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।

मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल के डीजी सोहिन्द्र सिंह गिल ने कहा कि, महाराष्ट्र सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी का ड्राफ्ट बहुत ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे लागू करती है तो 2025 तक हम अपने सभी लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ने के लिए सभी सेगमेंट के व्हीकल का प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत है। उदाहरण के लिए उन्होंने बताया कि हम 2025 तक इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर और टू व्हीलर श्रेणी में 25 प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त करने का लक्ष्य रख सकते हैं। सरकार तत्काल मांग को बढ़ावा देने और कौशल विकास के लिए कुछ वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश करके ऐसा कर सकती है।

बैटरी उद्योग के लिए 18,000 करोड़ की PLI स्कीम
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम की स्वीकृति दी है। अभी इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी को बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। सरकार चाहती है कि इंपोर्ट को कम कर घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाए।

इस मिशन के तहत एनवायरमेंट फ्रेंडली विकल्पों के लिए नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अगुवाई में एक इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी बनी थी। मिशन का लक्ष्य बड़े स्तर पर बैटरी मॉड्यूल और असेंबली प्लांट लगाना है। साथ ही, इंटीग्रेटेड सेल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया जाएगा।

देश में बैटरी बनाने वाली हर छोटी-बड़ी कंपनी को इसका फायदा मिलेगा। साथ ही, घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग से देश में रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। केंद्र सरकार के अनुसार, भारत में हर साल 20 हजार करोड़ रुपये की बैटरी इंपोर्ट की जाती है। इन बैटरियों के देश में बनने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा मिलेगा। देश में बैटरी बनने से इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर्स और 4-व्हीलर्स तेजी से बढ़ेंगे।

इसके अलावा हैवी व्हीकल्स जैसे ट्रक को भी इलेक्ट्रिक पर लाने की तैयारी चल रही है। मौजूदा समय में फास्ट चार्जिंग बैटरी की जरूरत है। इस फैसले से बैटरी तकनीक के विकास पर भी बड़े स्तर पर काम शुरू होगा। बता दें कि रेलवे और शिपिंग में भी बैटरी के इस्तेमाल की तैयारी चल रही है।


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