महाराष्ट्र बनेगा इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण केंद्र, इस कंपनी ने किया 2,800 करोड़ रुपये का निवेश
महाराष्ट्र की राज्य सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए कॉसिस ई-मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के साथ 2,800 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। राज्य सरकार ने इस ईवी उत्पादन इकाई को पुणे के तलेगांव में स्थापित करने की योजना बनाई है। राज्य के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि 2,800 करोड़ रुपये के इस निवेश से रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि इस निवेश से 1,250 रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार और कॉसिस ई-मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो यूके स्थित कॉसिस ग्रुप का संयुक्त उद्यम है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के मामले में महाराष्ट्र अग्रणी राज्य बनने के लिए अग्रसर है।

ज्ञापन का पहला चरण ईवी निर्माण इकाई की स्थापना है, जिसके बाद कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी की आपूर्ति के लिए राज्य में अपनी बैटरी गीगाफैक्टरी भी स्थापित करेगी। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए इस साल के शुरूआत में इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा की है।

इस नीति के तहत निवेश आकर्षित करना, विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को सुगम बनाना, इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना, उनके घटक और ईवी आपूर्ति उपकरण शामिल हैं। इलेक्ट्रिक वाहन नीति चार्जिंग बुनियादी ढांचे के लिए विशेष प्रोत्साहनों पर भी विचार करती है।

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) ने एक बयान में कहा कि यह समझौता ज्ञापन ईवी वाहन निर्माण को बढ़ाएगा और शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद करेगा। महाराष्ट्र में ईवी नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद -बिक्री के साथ निवेश को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने 2025 तक 25 प्रतिशत टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर को इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य रखा है।

26,000 करोड़ रुपये की PLI स्कीम को मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन ईंधन वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ऑटो क्षेत्र के लिए लगभग 26,000 करोड़ रुपये की नई उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को आज मंजूरी दी है। सरकार के अनुमान के मुताबिक पीएलआई योजना ऑटो सेक्टर के लिए 7.5 लाख नौकरियां पैदा करेगी।

बता दें कि पिछले साल केंद्र सरकार ने ऑटोमोबाइल और कल-पुर्जा क्षेत्र के लिए 57,043 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम की घोषणा की थी। हालांकि, सरकार ने हाइड्रोजन ईंधन वाले वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस क्षेत्र के लिए योजना को घटाकर 25,938 करोड़ रुपये कर दिया है। यह योजना 5 साल के लिए लागू की गई है।

इस योजना के तहत ऑटो उद्योग में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक पॉवर स्टीयरिंग सिस्टम, सेंसर, सुपर कैपिसिटर, सनरूफ, अडाप्टिव फ्रंट लाइटिंग, ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और काॅलिजन वार्निंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियों को फायदा पहुंच सकता है।


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