दुनिया भर में लिथियम की सप्लाई हुई कम, बैटरियों और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ेंगी कीमतें
लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल करने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की तेजी से बढ़ती मांग के कारण वैश्विक बाजार में लिथियम की मांग बढ़ी है। इससे लिथियम की सप्लाई में कमी उत्पन्न हो गई है। चीन के साथ मुकाबला करने के लिए पश्चिमी देशों में नई खदानों को खोजने के लिए दौड़ चल रही है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्बिया की सरकार ने गुरुवार को एंग्लो-ऑस्ट्रेलियाई खनन कंपनी रियो टिंटो पीएलसी (Rio Tinto Plc) के मालिकाना हक वाले एक प्रमुख लिथियम प्रोजेक्ट का लाइसेंस कैंसल कर दिया।

मांग के अनुसार नहीं हो रहा उत्पादन
लिथियम का खनन हार्ड रॉक या नमकीन खानों से किया जाता है। हार्ड रॉक खदानों से उत्पादन के साथ ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। अर्जेंटीना, चिली और चीन मुख्य रूप से नमक की झीलों से इसका उत्पादन कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के उद्योग विभाग के अनुसार, लिथियम का कुल वैश्विक उत्पादन 2021 में 485,000 टन, 2022 में 615,000 टन और 2023 में 8,21,000 टन होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, क्रेडिट सुइस ने लिथियम की आपूर्ति मांग की तुलना में कम होने की आशंका जताई गई थी।

क्रेडिट सुइस ने अपने विश्लेषण के अनुसार, लिथियम का उत्पादन 2022 में 5,88,000 टन और 2023 में 7,36,000 होने का अनुमान लगाया था जबकि इसकी दौरान 2022 में 6,89,000 टन और 2023 में 9,02,000 टन लिथियम की मांग होने की जानकारी दी थी।

चीनी निर्माताओं ने बिगाड़ा खेल
चीनी बैटरी निर्माताओं के द्वारा अधिक मांग होने के कारण लिथियम कार्बोनेट की कीमतें पिछले एक साल में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। लिथियम उत्पादों की सबसे की सबसे बड़ी उत्पादक, ऑलकेम ने इस महीने की शुरूआत में कहा था कि लिथियम की कीमत प्रति टन 20,000 डॉलर (लगभग 15 लाख रुपये) तक बढ़ सकती है, जो पिछले डेढ़ साल की कीमत से 80 प्रतिशत अधिक होगा।

बढ़ेगी ई-वहनों की कीमत
मौजूदा समय में वाहन निर्माता लिथियम की कोई बड़ी कमी का सामना नहीं कर रहे है, लेकिन जल्द ही उत्पादन में कमी की वजह से कीमतें प्रभावित हो सकती है। कई विश्लेषकों और विशेषज्ञों ने बताया है कि जैसे-जैसे अधिक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) की मांग बढ़ेगी, लिथियम की कीमत आसमान छूने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माता लागत कम करने के लिए कीमत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगे, इस प्रकार जीवाश्म ईंधन आधारित पारंपरिक वाहनों (आईसीई) को फेज-आउट करने की रफ़्तार धीमी पड़ जाएगी।


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