Kanchanjunga Express Accident: सुबह से खराब था सिग्नल, फिर भी ड्राइवर ने की ये बड़ी गलती! जांच में बड़ा खुलासा

West Bengal Train Accident : पश्चिम बंगाल में सोमवार को एक मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) की टक्कर में 9 लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक 40-45 लोग घायल हैं। यह भारत में इस साल का सबसे भीषण रेल हादसा है। कंचनजंगा एक्सप्रेस अगरतला से पश्चिम बंगाल के सियालदह जा रही थी। इस दौरान न्यू जलपाईपुरी में हादसा हुआ है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कैसे एक ट्रैक पर दो ट्रेन टकरा गई? इस रेल दुर्घटना के कारणों की जांच की गई तो पता चला कि मालगाड़ी चला रहे ड्राइवर ने सिग्नल नियमों का उल्लघंन किया है।

Kanchenjunga Express Accident

इस रेल हादसे की शुरुआती जांच में पता चला कि, जिस इलाके में हादसा हुआ वह ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम वाला इलाका है। हालांकि इस रूट पर रानीपतरा रेलवे स्टेशन और चत्तर हाट जंक्शन के बीच रेल सिग्नल सुबह 5.50 बजे से खराब था।

जिसके कारण सभी लोको पायलट को रेड सिग्नल पार करने के लिए टीए 912 नामक एक फॉर्म दिया गया था। जानकारी के मुताबिक मालवाहक ट्रेन के ड्राइवर का 'अधिक गति' से मालगाड़ी चला रहा था, जिसकी वजब से हादसा हुआ है।

Kanchenjunga Express Accident

क्या होता है टीए 912 फॉर्म : आप सोच रहे होंगे कि ये टीए 912 फार्म क्या होता है? दरअसल यह एक ऐसा दस्तावेज है, जो ट्रेन ड्राइवरों को सिग्नल खराब होने की स्थिति में पार करने की अनुमति के तौर पर दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी रूट के सिग्नल में कोई समस्या है और सिग्नल ठीक से काम नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति में टीए 912 दस्तावेज जारी किए जाते हैं। इसके बाद लोको पायलट रेड सिग्नल के बाद भी ट्रेन चला सकते हैं।

Kanchenjunga Express Accident

रिपोर्ट के मुताबिक रानीपतरा में स्टेशन मास्टर ने सियालदह-कंचनजंघा एक्सप्रेस (13174) को टीए 912 नोट (फॉर्म) जारी किया था। जिसके बाद ट्रेन खराब सिग्नल वाली रूट पर आगे बढ़ रही थी।

हालांकि, अब तक स्पष्ट नहीं है कि मालगाड़ी को टीए 912' फॉर्म दिया गया था या नहीं। हालांकि अब सवाल ये है कि बिना अनुमति के मालगाड़ी के लोको पायलट ने खराब सिग्नल को कैसे पार कर लिया?

क्या है खराब सिग्नल पार करने का नियम : रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक अगर किसी भी ट्रेन को खराब रेड सिग्नल पार करने के लिए 'टीए 912' नहीं दिया गया था तो लोको-पायलट को सभी खराब सिग्नल पर ट्रेन को एक मिनट के लिए रोकना होता है।

इसके बाद ट्रेन को 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ना होता है। बहरहाल रेलवे इस बात की जांच चल रही है कि जिस ट्रैक पर कंचनजंगा एक्सप्रेस पहले से चल रही थी, उस ट्रैक पर सिग्नल नहीं होने के बाद भी मालगाड़ी कैसे आगे बढ़ गई?

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Article Published On: Tuesday, June 18, 2024, 14:47 [IST]
English summary
Kanchenjunga express accident human error or signal failure check reason of bengal train accident
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