कार चलाने की चाहत पर जन्म से नहीं थे हाथ, 5 साल के संघर्ष के बाद इस महिला को मिला ड्राइविंग लाइसेंस!
आज के युवा जैसे ही 18 वर्ष के होते हैं तभी से अपने ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए आवेदन शुरु कर देते हैं। आप जानते हैं कि भारत में लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। ऐसे में एक बगैर हाथ की महिला को ड्राइविंग लाइसेंस मिलना कितनी बड़ी बात है।
जी हां! कुछ ऐसा ही वाकया केरल में भी देखने को मिला। जब बिना हाथों के जन्म लेने वाली एक महिला के सपने को राज्य सरकार और एक स्थानीय स्टार्ट-अप ने नई उड़ान दी है।
केरल की रहने वाली जिलुमोल मैरिएट हमेशा खुद कार चलाने का सपना देखती थी। लेकिन हाथ नहीं होने के कारण उनके लिए वैध ड्राइविंग आसान नहीं था। लेकिन कहते हैं कि हौसला को उड़ान मिलती है।
अब जाकर केरल सरकार ने अब उस सपने को साकार करने में मदद की है। अब वह न केवल कार चला सकती हैं, बल्कि उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस भी मिल गया है। बता दें कि 32 वर्षीय जिलुमोल एम. थॉमस मूल रूप से इडुक्की जिले के रहने वाली हैं।

वर्तमान में जिलुमोल में एक निजी फर्म में ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम कर रही हैं और वह एक कलाकार भी हैं। दोनों हाथों के बिना जन्मे जिलुमोल ने अपने पैरों से कार चलाने का सपना देखा। लेकिन क़ानूनी नियमों ने उसे इसकी इजाज़त नहीं दी।
पहली बार जब ड्राइविंग के लाइसेंस का आवेदन किया, तो उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब पांच साल पहले जिलुमोल के आवेदन को अधिकारियों ने खारिज कर दिया था।

लेकिन वह यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने राज्य विकलांग आयोग से संपर्क किया और मामला उनके संज्ञान में लाया। आयोग ने राज्य परिवहन आयुक्त को मामले को गंभीरता से देखने और समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया।
परिवहन आयुक्त ने एर्नाकुलम जिले के मोटर वाहन विभाग के अधिकारियों को मामले का विस्तार से अध्ययन करने और उचित समाधान प्रदान करने का निर्देश दिया। मामले का अध्ययन करने के बाद, अधिकारियों ने कार को जिलुमोल के लिए उपयुक्त बनाने के लिए कई बदलावों का सुझाव दिया।

हालाँकि अधिकारियों ने आवश्यक बदलावों का सुझाव दिया था, लेकिन ऐसे बदलाव करने के लिए क्षेत्र में कोई स्थानीय निकाय उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद विभाग ने इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को बुलाया और एक साल के भीतर कार को कस्टमाइज किया।
कोच्चि स्थित फर्म ने 2018 मॉडल सेलेरियो हैचबैक के लिए सभी इलेक्ट्रॉनिक्स-संबंधित संशोधनों किया है। कार के प्रमुख कंट्रोल को पैरों का उपयोग करके संचालित करने हेतु डिजाइन किया गया है।

इंडीकेटर्स, वाइपर, हेडलैंप जैसे फीचर्स के लिए वॉइस कमांड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, ताकि वो फीचर्स जिनमें हाथों के इस्तेमाल की जरुरत पड़ती है, उन्हें वॉइस कमांड के जरिये ऑपरेट किया जा सके।
ये सभी परिवर्तन करने के बाद, एमवीडी ने कहा कि ये कस्टमाइज वाहन जिलुमोल सार्वजनिक सड़कों पर चला सकती हैं। बता दें कि जिलुमोल ने इस साल मार्च में लर्नर टेस्ट पास कर लिया। नवंबर में उन्होंने अपनी मारुति सेलेरियो में ड्राइविंग टेस्ट पास किया।

एमवीडी ने कार की आरसी में भी बदलाव किया है। ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए जिलुमोल का छह साल का संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया। हाल ही में एक कार्क्रम के दौरान उन्हें केरल के मुख्यमंत्री ने उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा है।


Click it and Unblock the Notifications








