जंतर-मंतर पर खड़ी कबाड़ कार का वीडियो वायरल, क्या है रोड सेफ्टी का असली सच?
जंतर-मंतर के प्रोटेस्ट गेट के पास खड़ी एक कबाड़ हो चुकी कार का वीडियो गुरुवार, 23 जुलाई को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। सुबह से ही सर्कुलेट हो रही इन क्लिप्स ने सड़क सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के तरीकों पर एक नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आज एक बयान जारी कर इस वाहन को लेकर इंटरनेट पर किए जा रहे दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। यह घटना दिखाती है कि सड़क किनारे खड़ी कंडम गाड़ियां राहगीरों के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं।
व्यस्त सड़कों पर दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों की मौजूदगी के मामले में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन होना जरूरी है। स्थानीय नियमों के मुताबिक, बुरी तरह डैमेज हो चुकी गाड़ियों को हटाने के लिए एजेंसियों को फ्लैटबेड ट्रक का ही इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही, दूसरे ड्राइवरों को अलर्ट करने के लिए वहां हाई-विजिबिलिटी वाले डेंजर साइन (खतरे के संकेत) भी लगाने चाहिए। ये कदम रात के समय होने वाली टक्करों को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं कि प्रदर्शनों की वजह से आम जनता की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

डैमेज कार को हटाने के लिए क्या हैं रोड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स?
रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान गाड़ियों की नंबर प्लेट को छिपाना जरूरी है। ऐसा करने से गाड़ी के मालिक की प्राइवेसी सुरक्षित रहती है और कानूनी या इंश्योरेंस से जुड़ी पेचीदगियों से बचा जा सकता है। दिल्ली में सड़क पर कबाड़ गाड़ी छोड़ने पर भारी चालान का प्रावधान है। ट्रैफिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये गाड़ियां इमरजेंसी रास्तों या चौराहों पर रुकावट न पैदा करें।
| टोइंग का तरीका | कब इस्तेमाल करें | सुरक्षा का स्तर |
|---|---|---|
| फ्लैटबेड ट्रक | गाड़ी को भारी नुकसान होने पर | सबसे सुरक्षित |
| व्हील-लिफ्ट | जब आगे के पहिये काम कर रहे हों | मध्यम सुरक्षा |
| चेन हुक | सिर्फ कबाड़ ले जाने के लिए | कम सुरक्षा |
अगर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन किए बिना गाड़ी को हटाया जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम देने से मना कर सकती हैं। इसके अलावा, अगर कबाड़ गाड़ी की वजह से किसी को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होती है। सही तरीके से टोइंग करने पर गाड़ी के स्ट्रक्चर को और नुकसान नहीं पहुंचता। वहीं, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) की मदद से अधिकारी इन गाड़ियों के स्टोरेज लोकेशन को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।
ड्राइवरों को बैरिकेड या प्रदर्शन के सामान के तौर पर इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों को लेकर हमेशा सावधान रहना चाहिए। आज की वायरल घटना ने साफ कर दिया है कि डैमेज गाड़ियों पर रिफ्लेक्टिव टेप और रात में विजिबिलिटी होना कितना जरूरी है। अगर आपको सड़क पर ऐसी कोई कंडम गाड़ी दिखे जिसमें लाइट न हो, तो तुरंत स्थानीय ट्रैफिक पुलिस से संपर्क करें। इन गाइडलाइन्स का पालन करने से व्यवस्था बनी रहती है और बड़े शहरों में होने वाले हादसों को टाला जा सकता है।


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