Pushpak कार्यक्रम के तहत एक और LEX लैंडिंग डिवाइस का टेस्टिंग करेगी ISRO, जानें डिटेल्स
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने पुष्पक कार्यक्रम के तहत विकसित LEX लैंडिंग डिवाइस का इस सप्ताह दूसरी बार फिर से परीक्षण करने की तैयारी कर रही है। ISRO ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी है।
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने 2023 तक भारत का पहला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। लॉन्च करने का ऐलान किया है.भारत 2035 तक अंतरिक्ष में एक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की पर काम कर रहा है।

इसके लिए तमाम तकनीकें तैयार की जा रही हैं। मुख्य रूप से ISRO ऐसे रॉकेट तैयार कर रहा है जिन्हें बार-बार अंतरिक्ष में भेजा जा सके। इसरो ने इस रॉकेट का नाम पुष्पक रखा है।
इसरो के मुताबिक पुष्पक को बेहद कम लागत पर भारत से अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस तरह रॉकेट को अंतरिक्ष में जाने और सुरक्षित वापस लौटने के लिए धरती पर सुरक्षित लैंडिग की टेक्नोलॅाजी तैयारी कर ली गई है।
सेफ लैंडिग में सहायक उपकरण को LEX नाम दिया गया है। इस उपकरण का एक बार परीक्षण पहले ही किया जा चुका है, और अब परीक्षण का दूसरा चरण इस सप्ताह आयोजित किया जाएगा, इसरो ने आधिकारिक तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी घोषणा की है।
इस उद्देश्य के लिए इस रॉकेट को चिनूक हेलिकॉप्टर से एयर में छोड़ा जाएगा। इसके बाद रॉकेट एक्टिव होकर ऑटोमैटिक लैंड करेगा। पहले चरण में यह ट्रायल सफल हो चुका है.
परीक्षण के पहले चरण में केवल लैंडिंग की उचित योजना बनाई गई और उसका परीक्षण किया गया। परीक्षण के इस दूसरे चरण में, सफल लैंडिंग के बाद, रॉकेट को एक अलग दिशा में उतरने का प्रयास किया जाएगा।
यह परीक्षण इस सप्ताह के भीतर कर्नाटक के चित्रदुर्ग में इसरो के एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में होने की उम्मीद है। इसरो द्वारा निर्मित LEX रॉकेट को NASA द्वारा उपयोग किए गए रॉकेट के समान डिज़ाइन किया गया है।
नासा लगभग 30 वर्षों से अंतरिक्ष में जाने और पृथ्वी पर सुरक्षित लौटने के लिए इसी तरह के रॉकेट का उपयोग कर रहा है। इसरो ने रॉकेट को भी इसी तरह के डिजाइन में विकसित किया है।
इसे पृथ्वी से उड़ान भरने पर रॉकेट की तरह सीधे ऊपर जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन जब यह पृथ्वी पर वापस आता है तो हवाई जहाज की तरह रनवे पर उतरता है।
रॉकेट पृथ्वी पर उतरते समय लगभग 350 किमी/घंटा की गति से उतरने में सक्षम होगा। फिर जब यह जमीन पर उतरता है तो इसके पीछे एक पैराशूट खुलता है, जो इसे धीमा कर देता है और बिना किसी नुकसान के इसे जमीन पर सुरक्षित लैंड कराता है।


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