नैनो के बारे में 15 रोचक जानकारियाँ
टाटा नैनो जब चर्चा में आयी तब दुनिया की सबसे सस्ती कार थी मगर अब ये सस्ती नहीं रही। जब ये लांच हुई थी इसमें कुछ एक चीजें ऐसी रखी गयी थी और कुछ ऐसी चीजें नहीं की गयी थी जिससे उसकी कीमत कम थी।
ये कार साइज के हिसाब से बहुत ज्यादा सुविधाएं देती है। इस वक्त नैनो में एयर कंडीशन, पॉवर स्टेरिंग, पॉवर विंडो के साथ ही एलोय व्हील भी मौजूद है।
चलिए एक नजर डालते हैं टाटा नैनो के 15 अमेजिंग फैक्ट पर। बहुत कुछ इसमें ऐसा भी है कि इसे सस्ता रखा जाए ताकि कम पैसे में ज्यादा सुविधा दी जा सके।

टाटा नैनो जब लांच हुई थी तो इसमें पॉवर स्टेयरिंग भी नही थी। यहां तक इसकी टॉप वैरिएंट मॉडल में भी सामान्य स्टेयरिंग ही थी। वहीं जो इसकी नयी मॉडल आयी है उसमें इलेक्ट्रिक असिस्टेड पॉवर स्टेयरिंग है।

इसकी स्टैंडर वैरिएंट भी एसी, पॉवर विंडो और म्यूजिक सिस्टम की बेसिक सुविधाओं से महरूम थी।

2009 में जब ये कार आयी तो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में इसे दुनिया की सबसे सस्ती कार होने का खिताब मिला।

अगर बंपर से बंपर तक मापी जाए तो ये मारूति 800 से भी छोटी है। फिर भी इसमें स्पेस काफी ज्यादा है।

नैनो में पहियों को संभालने के लिए सिर्फ तीन ही बोल्ट है जबकि दूसरी कारों से इसकी तुलना कि जाए तो उनमें चार बोल्ट होते हैं पहियों को कसने के लिए।

आने वाली नैनो में खुलने वाले बूट मौजूद होंगे। नैनो के बूट शुरूआती मॉडल में सामान रखने वाली जगह को बाकी कारों की तरह नहीं खोला जा सकता है। इसकी वजह ये थी कि इसे ओपनेबल बनाने के लिए इसकी कास्ट बढानी पड़ती।

टाटा नैनो में ईधन डालने के लिए उसे सामने से खोलना पडता है, जिसके लिए इसका बोनट खोलना पडता है। इसे भी ऐसा इसलिए ही किया गया था ताकि कीमत ज्यादा न हो सके।

कार की स्पेयर व्हील बोनट में ही रहती है। बाकी कारों की तरह इसमें पीछे या कार के अन्दर रखने का विकल्प इसमें नही है।

पॉवर विंडो आगे की दोनों विंडों में है जोकि चालक और पैसेंजर की सीट के बीच में मौजूद है। ये भी कास्ट कटिंग का ही हिस्सा है क्योंकि एक्स्ट्रा स्वीच से एक्स्ट्रा कास्ट होती।

टाटा नैनो में ग्राउंड क्लीयरेंस 180 एमएम का है जो कि बोलेरो और स्कार्पियो जैसी कारों के जैसा ही है।

नैनो में सेंटर कंसोल है जिससे स्टेरिंग की साइड बदलने में आसानी हो। कई देशों में स्टेरिंग दाहिने साइड होती है जबकि कई में बाएं तरफ होती है। ये भी गाड़ी की कीमत कम करने के लिए किया गया था।

टाटा मोटर्स ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के लिये 34 पेटेंट अप्लाई किया था नैनो को बनाने के लिए।

टाटा नैनो अब वैसी नहीं बिक रही है जिस तरह वो वर्ल्ड सबसे सस्ती कार के तौर पर लांच कि गयी थी क्योंकि अब इसकी कीमत काफी बढ चुकी है।

वेल्डिंग को छोडकर कई जगहों पर प्लास्टिक और एडहीसिव का इस्तेमाल किया गया था। क्योंकि वेल्डिंग महंगी थी।

गुजराती में नैनो का मतलब छोटा होता है। नैनो टेक्नोलॉजी भी इसके नाम का एक तरीका था।


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