2,500 साल पुरानी है 2,500 KM की यह भारतीय सड़क, बंगलादेश, पाक और अफगान तक होता है कनेक्ट
आज हम आपको भारत ही नहीं दुनिया के सबसे पुराने राजमार्ग जीटी रोड के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसकी लम्बाई, चौड़ाई और इतिहास आपको हैरान करके रख देगा।
जी हां, हम दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और लम्बे मार्ग ग्रैंड ट्रंक रोड की ही बात कर रहे हैं। वैसे तो सभी भारतीय जानते हैं कि यह सड़क भारत की सबसे पुरानी सड़क है और इसके आधुनिक प्रारुप का निर्माण शेरशाह सूरी ने कराया था। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि यह सड़क सूरी के काल से और भी पुरानी है।

आपको बता दें कि ग्रांड ट्रक रोड का जिक्र मौर्यकाल से ही मिलता है। हालांकि यह उस दौरान में उत्तरपथ के नाम से जानी जाती थी। बाद में भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी भागों को जोड़ने वाली इस सड़क का नाम शाह राह-ए-आजम,सड़क-ए-आजम और बादशाही सड़क के नामों से भी जाना जाने लगा।

ग्रांड ट्रक का नाम तो अग्रेंजों के जमाने में दिया गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2,500 किमी की यह सड़क बंगलादेश के चटगाँव से प्रारंभ होकर लाहौर (पाकिस्तान) से होते हुए अफ़ग़ानिस्तान में काबुल तक जाता है। इसी मार्ग पर भारत व पाकिस्तान की सीमा वाघा बार्डर भी है।

ऐतिहासिक महत्व
ग्रांड ट्रंक रोड का प्रचीन काल से ही एक प्रमुख व्यापार मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इतिहास में विभिन्न अवधियों के दौरान इस मार्ग को अलग-अलग नामों से बुलाया जाता था। चार मुख्य साम्राज्यों ने इसका विस्तार एवं व्यापार के लिए उपयोग किया।
-मौर्य साम्राज्य (3 सदी ई॰पू॰)
-शेर शाह सूरी (16 सदी)
-मुग़ल साम्राज्य (16 सदी)
-ब्रिटिश साम्राज्य (1833-1860)

मौर्य काल में (3 सदी ई॰पू॰)
मौर्य काल में इस सड़क को उत्तरपथ के नाम से जाना जाता था। यह मार्ग गंगा नदी के किनारे की बगल से होते हुए, गंगा के मैदान के पार, पंजाब के रास्ते से तक्षशिला को जाता था। भारत के पूर्वी तट पर समुद्री बंदरगाहों के साथ समुद्री संपर्कों में वृद्धि की वजह से मौर्य साम्राज्य के काल में इस मार्ग का महत्व बढा और इसका व्यापार के लिए उपयोग होने लगा। आठ चरणों में निर्मित यह राजमार्ग, पेशावर, तक्षशिला, हस्तिनापुर,कन्नौज, प्रयाग, पाटलिपुत्र और ताम्रलिप्त के शहरों को ज़ोडने का काम करता था।

मुगल काल में
मौर्य काल के बाद इस मार्ग में तब बड़ा बदलाव हुआ जब इस मार्ग का ज्यादातर भाग शेर शाह सूरी द्वारा नए सिरे से पुनर्निर्मित कराया गया। अफगान सम्राट, शेर शाह सूरी ने संक्षिप्त अवधि के लिए ज्यादातर उत्तरी भारत पर शासन किया था। इस मार्ग के निर्माण के मुख्य उद्देश्य थे-
-प्रशासनिक और सैन्य कारणों के लिए अपने विशाल साम्राज्य के सुदूर प्रांतों को एक साथ जोड़ना।
-सासाराम, अपने गृहनगर के साथ, आगरा, अपनी राजधानी को जोड़ना।

लेकिन शेर शाह सूरी के जल्दी देहांत हो जाने के कारण सड़क-ए-आजम उनके नाम पर समर्पित कर दी गई। इसके बाद मुगल शासको ने इसे पश्चिम में ख़ैबर दर्रे को पार कर काबुल तक और पूर्व में बंगाल के चटगाँव बंदरगाह तक बढ़ाया।

अंग्रेजों के काल में
17वीं वीं सदी में इस मार्ग का ब्रिटिश शासकों ने पुनर्निर्माण किया और इसका नाम बदलकर ग्रैंड ट्रंक रोड कर दिया। अभी यह मार्ग ज्यादतर उत्तर भारत को जोडता है। ब्रिटिश इस मार्ग को लाँग रोड (long road) भी कहते थे।शेर शाह सूरी के जमाने में सड़कों को नियमित अंतराल पर चिन्हित किया जाता था और पेड़ सड़क के किनारे पर लगाए जाते थे। कहीं कहीं यह कोस मीनारें अब भी देखने को मिलती हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पाकिस्तान में यह सड़के अब भी देखने को मिलती हैं।

सड़क का वर्तमान स्वरूप
हालांकि कई जगहों पर इसके नाम को बदल दिया गया है। लेकिन पुराने लोग अब भी इस मार्ग को इसी नाम से जानते हैं। कई बड़े शहरों में बाईपास आदि बनने के कारण कई स्थानों पर यह अपने मूल स्थान से हट भी गई है।

उदाहरण के लिए वर्तमान में दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर में स्थित कोसमीनार इस बात का प्रमाण है कि किसी समय में यह सड़क उस स्थान से निकलती थी। वहीं हरियाणा के सोनीपत में भी कोस मीनार देखे जा सकते हैं किंतु अब यह सड़क सोनीपत से कुछ किलोमीटर पूर्व में स्थित मुरथल व बहालगढ़ से होकर गुज़रती है।

आपको बता दें कि हावड़ा से कानपुर तक के खण्ड को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 से नामित किया गया है। जबकि कानपुर से गाज़ियाबाद तक के खण्ड को राष्ट्रीय राजमार्ग 91 के नाम से जाना जाता है। दिल्ली से हरियाणा और पंजाब राज्यों से अमृतसर होते हुए अटारी तक का खण्ड को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1 है। यहाँ से यह सड़क पाकिस्तान के वाघा में प्रवेश करती है।

इन प्रमुख भारतीय शहरों को है जोड़ती
ग्रांड ट्रक रोड जिसे जीटी रोड या राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या नम्बर के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत में हावड़ा से लेकर बर्धमान, पानागड़, दुर्गापुर, आसनसोल, धनबाद, औरंगाबाद, डेहरी आन सोन, सासाराम, मोहानिया, मुग़लसराय, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर, कलियाणपुर, कन्नौज, एटा, अलीगढ़, ग़ाज़ियाबाद, दिल्ली, पानीपत, करनाल, अम्बाला, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर तक को जोड़ता है।

विदेशों में ग्रांड ट्रक रोड
ग्रांड ट्रक रोड विदेशों में बांगलादेश के चटगाँव शहर से इसका आरंभ होता है और नारायणगंज जिले से होते हुए भारत में प्रवेश करता है। पाकिस्तान की अटारी सीमा से यह मार्ग लाहौर, गुजरांवाला, गुजरात, झेलम, रावलपिंडी, अटक, नॉशेरा और पेशावर तक जाता है।

जबकि अफ़ग़ानिस्तान में यह मार्ग ख़ैबर दर्रा से शुरु होता है और जलालाबाद, सुरोबि से होते हुए काबुल में जाकर समाप्त होता है। इस मार्ग का ज्यादातर भाग जलालाबाद-काबुल राजमार्ग का हिस्सा है।
स्त्रोत- वीकिपीडिया
Picture credit: Wiki Commons
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