Vehicle Insurance: अगर वाहन का इंश्योरेंस वैद्य नहीं है तो बीमा कंपनी नहीं देगी क्लेम, जानें क्या है नियम
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वाहन का रजिस्ट्रेशन वैद्य नहीं होने पर इंश्योरंस कंपनी दावे को खारिज कर सकती है। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन वैद्य नहीं होने पर इसे मौलिक नियमों का उल्लंघन माना जाता है। कोर्ट ने आगे बताया कि इस स्थिति में अगर कोई वाहन मालिक वाहन का इंश्योरेंस क्लेम करता है तो वह अमान्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को वाहन चोरी से संबंधित एक बीमा क्लेम (insurance claim) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए वाहन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। अगर वाहन रजिस्ट्रेशन वैद्य नहीं है यह समाप्त हो चुका है तो यह वाहन बीमा (vehicle insurance) कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन करता है। एक मामले में वाहन मालिक ने इंश्योरेंस कंपनी से 6.17 रुपये के बीमा क्लेम के लिए उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की थी, जिसे इंश्योरेंस कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

क्या है पूरा मामला
इस मामले में वाहन मालिक ने नई गाड़ी खरीदी थी जिसका अस्थाई रजिस्ट्रेशन कराया गया था। वाहन का रजिस्ट्रेशन समाप्त होने के बाद इसे अपने शहर से बाहर चलाया गया, जहां यह गाड़ी पार्किंग में खड़ी होने के दौरान चोरी हो गई। वाहन मालिक ने बीमा के लिए क्लेम किया लेकिन बीमा कंपनी ने यह कह कर क्लेम से मना कर दिया कि वाहन का रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुका है।

इसके बाद पॉलिसीधारक ने जिला फोरम से संपर्क किया और 1,40,000 रुपये के किराये की राशि के साथ बीमा की राशि का भुगतान करने के निर्देश की मांग की। इसको लेकर शिकायत खारिज हो गई।

गाड़ी का नहीं था वैद्य रजिस्ट्रेशन
याचिका का पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पाया कि चोरी के दिन वाहन बिना रजिस्ट्रेशन के चलाया गया था, जो मोटर साफ तौर पर मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन तो है ही साथ में बीमा शर्तों का मौलिक उल्लंघन भी है। अदालत ने आगे कहा कि इस मामले में बीमा कंपनी को क्लेम अस्वीकार करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के फैसले को रद्द कर दिया।

बीमा कंपनी ने दिया तर्क
इंश्योरेंस कंपनी ने बेंच के सामने तर्क दिया कि चूंकि विचाराधीन वाहन का कोई पंजीकरण नहीं था, इसलिए यह पॉलिसी का एक मौलिक उल्लंघन है। जिसके तहत बीमा कंपनी को इसके तहत दावों को अस्वीकार करने का अधिकार है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
मोटर वाहन अधिनियम के अनुच्छेद 3 और 5 के अनुसार बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलना कानूनन अपराध है। वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होने पर इंश्योरेंस कंपनियां वाहन दुर्घटना का क्लेम खारिज कर सकती हैं। नए मोटर वाहन एक्ट के लागू होने के बाद ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए सख्ती बरती जा रही है। वाहन का इंश्योरेंस कराते समय पॉलिसी के नियम व शर्तों की जानकारी होनी चाहिए। इंश्योरेंस क्लेम की परिस्थितिओं को जानने के लिए यह आवश्यक है।


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