देश का पहला बुलेट ट्रेन 2026 में होगा शुरू, अहमदाबाद से मुंबई के बीच होगी तेज रफ्तार यात्रा
अगर आप भारत में बुलेट ट्रेन से सफर करने का सपना देख रहे हैं तो यह जल्द ही हकीकत में बदल सकता है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 2026 में पूरा हो जाएगा और इसी साल बुलेट ट्रेनों का परिचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को 2023 में ही पूरा करना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी और कोरोना महामारी के वजह से अब प्रोजेक्ट का डेडलाइन बढ़ा दिया गया है।

आपको बता दें कि देश का पहला बुलेट ट्रेन नेटवर्क अहमदाबाद से मुंबई तक के लिए है। वहीं, पहले चरण में बुलेट रेल को सूरत से बिलमोरा तक के लिए 61 किलोमीटर के स्ट्रेच पर शुरू किया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "हम 2026 में सूरत और बिलिमोरा के बीच पहली बुलेट ट्रेन चलाने का लक्ष्य रख रहे हैं। प्रगति बहुत अच्छी है, और हमें उम्मीद है कि तय समय पर ट्रेन शुरू कर दी जाएगी।"

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "परियोजना के परिणाम जल्द ही पूरे लाभ और हानि के ब्रेकअप के साथ सामने आएंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत स्टार्टअप के मामले में नंबर एक स्थान पर है क्योंकि सरकार स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। सेमीकंडक्टर के उत्पादन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ढाई साल के भीतर भारत में सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

रेल किराए के बारे में वैष्णव ने कहा कि मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधा के लिए किराए में वृद्धि नहीं की है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सरकार का रेलवे की कीमतों में वृद्धि करने का कोई इरादा नहीं है। यह कहते हुए कि पहले से ही बिछाई गई पटरियों को मजबूत करने के अलावा कई परियोजनाएं चल रही हैं।

बताते चलें कि इस साल मार्च में रेलवे ने स्वचालित रेल दुर्घटना सुरक्षा प्रणाली 'कवच' का सफलतापूर्वक परीक्षण संपन्न किया। ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई 'कवच' तकनीक को दुनिया की सबसे सस्ती ट्रेन दुर्घटना सुरक्षा प्रणाली के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।

रेलवे ने 'शून्य दुर्घटना' के अपने उद्देश्य को पूरा करने में सहायता करने के लिए स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली को इन-हाउस बनाया है। कवच एक ऐसी प्रणाली है जो एक निश्चित सीमा के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता लगाने पर स्वचालित रूप से एक ट्रेन को रोक देती है।

जानकारी के मुताबिक कवच एक एंटी कोलिजन डिवाइस नेटवर्क है, जो कि रेडियो कम्युनिकेशन, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबर पोजिशनिंग सिस्टम तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक की मदद से उम्मीद लगाई जा रही है कि रेलवे 'शून्य दुर्घटना' के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा। इसके तहत जब दो आने वाली ट्रेनों पर इसका उपयोग होगा तो ये तकनीक उन्हें एक दूसरे का आकलन करने और टकराव के जोखिम का आकलन करते हुए ऑटोमेटिक ब्रेकिंग एक्शन शुरू कर देगी। इससे ट्रेनें टकराने से बच सकेंगीं।

रेलवे मंत्री अश्विन वैष्णव ने इस तकनीक की विश्वसनीयता के संबंध में बताया कि यह SIL4 प्रमाणित है जिसका अर्थ है कि 10,000 साल में कोई एक गलती की संभावना है।


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