अमरीका के जीपीएस पर नहीं रहेंगे निर्भर, भारत ने बनाया स्वदेशी इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम
नेविगेशन सिस्टम सेक्टर में भारत के आप अब अपना खुद का सिस्टम होगा। जैसे अमरीका का जीपीएस, रूस का ग्लोनैस, यूरोप का गैलीलियो, चीन का बीडू और जापान का क्वॉसी जेनिथ सैटेलाइट सिस्टम है, ठीक वैसे ही अब भारत का अपना सिस्टम होगा। इसका नाम होगा आईआरएनएसएस यानी इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम। इसके बाद हमारे देश की अमरीका के जीपीएस यानी ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम पर भी निर्भरता खत्म हो जाएगी। जानिए इस स्वदेशी नैविगेशन सिस्टम की पूरी डिटेल इस स्लाइडशो में :

भारतीय वैज्ञानिकों ने विज्ञान के क्षेत्र में हाल ही एक बड़ा और अहम कदम बढ़ाया है। देश का पांचवां नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ई सफलता पूर्वक लॉन्च किया जा चुका है। आपको बता दें कि यह इस साल का लॉन्च हुआ भारत का पहला रॉकेट है। इसके साथ ही जो बड़े गर्व की बात है, वह यह कि अब भारत के पास अपना खुद का होगा। अब हमारी अमरीका के जीपीएस यानी ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।

ये हैं आईआरएनएसएस की विशेषताएं :
- आईआरएनएसएस-1ई आईआरएनएसएस अंतरिक्ष प्रणाली का पांचवा दिशासूचक उपग्रह है।
- इस प्रणाली के तहत कुल सात उपग्रह हैं और इन सभी का प्रक्षेपण हो जाने के बाद यह प्रणाली अमेरिका आधारित जीपीएस के बराबर हो जायेगा।
- इसकी कामयाबी के साथ ही भारत का अपना न केवल उपग्रहों का जाल तैयार हो जाएगा बल्कि देश के पास अपना जीपीएस शुरू हो जाएगा।
- एरियल और मरीन नैविगेशन
- डिजास्टर मैनेजमेंट
- व्हीकल ट्रैकिंग एण्ड फ्लीट मैनेजमेंट

जीपीएस की तुलना में है बेहतर
इसरो के मुताबिक, आईआरएनएसएस जुलाई 2016 से प्रभावी रूप से काम करने लगेगा। इसरो के वैज्ञानिकों ने मोबाइल कंपनीज और जीआईएस यानी ग्लोबल इंफॉर्मेशन सिस्टम एण्ड नेविगेशन डिवाइस निर्माताओं के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने जीपीएस के मुकाबले आईआरएनएसस की खूबियों को गिनाया। भारत का यह नया सिस्टम डेस्टिनशन से 20 मीटर के आसपास तक की एग्जैक्ट लोकेशन देगा।

इनमें होगा प्रयोग :

इसरो दो तरीके से इस सिस्टम को प्रयोग में लाएगा :
1. स्टैंडर्ड पोजीशनिंग सर्विस - Standard Positioning Service(SPS)
2. रेस्ट्रिक्टेड सर्विस - Restricted Service(RS)



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