भारतीय-मूल का कार सेल्समैन एनबीए के 'हाल ऑफ फेम' में हुआ शामिल, जानिये नव भाटिया की यह प्रेरक कहानी
भारतीय-मूल के कार सेल्समैन, नव भाटिया हाल ही में एनबीए के 'हाल ऑफ फेम' में शामिल कर लिया गया है। यह सम्मान नव भाटिया बिना यह खेल खेले या कोच किये या टीम खरीदे बिना मिला है, यह कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लिए एक बहुत बड़ी बात है। आइये जानते हैं नव भाटिया की प्रेरक कहानी के बारें में।

नव भाटिया, नई दिल्ली में पैदा हुए और वहीं उनका पालन पोषण हुआ। उन्होंने दिल्ली से मेकैनिकल में अपनी बैचलर की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद 1984 में सिख विरोधी दंगो के कारण वह देश छोड़कर चले गये और कनाडा में जाकर बस गये। एक प्रवासी, ऊपर से पगड़ी व दाढ़ी जैसे पहचान की वजह से उनकी कनाडा में शुरुआत उतनी अच्छी नहीं रही थी।

एक मेकैनिकल इंजीनियर होने के बावजूद उन्हें वहां कोई नौकरी नहीं मिली। इसके बाद कई तरह के सैंकड़ों जगह अप्लाई करने के बाद उन्हें अंततः कार सेल्समैन की नौकरी मिली। हालांकि वहां के समुदाय से भारी नफरत मिलने के बाद भी उनका हौसला टूटा नहीं है, इसकी जगह वह अपने काम पर ध्यान देते रहे।

कार सेल्समैन के नौकरी मिलते ही नव ने अपनी मार्केटिंग स्किल का उपयोग किया और सिर्फ 90 दिन में ही 127 कार बेच दिए। यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। उनके इस काम से प्रभावित होकर, नव भाटिया को शहर के बड़े डीलरशिप में जनरल मैनेजर के रूप में नियुक्त कर लिया। यह बिजनेस दिवालियापन की कगार पर था और बचे रहने के लिए तुरंत ही जरुरी कदमों की जरूरत थी।

नव भाटिया व उनके टीम के कुछ सालों की कड़ी मेहनत के बाद यह कार डीलरशिप ना कि दिवालियापन से बच गया बल्कि पूरे कनाडा की सबसे सफल व बड़ी डीलरशिप बन गयी। इसके बाद उन्होंने यह डीलरशिप मालिक से खरीद लिया और उसके बाद लगातार कई और डीलरशिप अपने झोले में डाल लिये।

कार बिक्री क्षेत्र में उनकी सफलता से हुंडई सीईओ भी प्रभावित हुए थे। इस वजह से उन्हें 2018 में उन्हें आरबीसी टॉप 25 कनाडियन इमिग्रेंट अवार्ड में भी शामिल किया गया था। इसके अलावा भी उन्हें कई अवार्ड मिले हैं। लेकिन सिर्फ कार नहीं, नव भाटिया को रैपटर्स एनबीए टीम से भी बहुत लगाव था।

जब से रैपटर्स ने 1995 में कोर्ट में प्रवेश किया था तब से उन्होंने एक भी गेम मिस किया था। चाहे टीम हारे या जीते, नव भाटिया हर मैच में टीम को पूरे सीजन में सपोर्ट करते थे। रैपटर्स के लगाव की वजह से 1998 में रैपटर्स सुपरफैन का टाइटल मिला था, उन्हें कोर्ट के बीच में जाकर यह अवार्ड दिया गया था।

नव भाटिया का नंब ही उस दिन इतिहास में शामिल हो गया जब रैपटर्स ने 2018 में एनबीए चैम्पियनशिप जीता। वह एनबीए के इतिहास में पहले फैन थे जिन्हें आधिकारिक चैम्पियनशिप रिंग मिली थी और इसके साथ ही वह टीम के चैम्पियनशिप परेड का भी हिस्सा थे।

उनके खेल व टीम के प्रति लगाव ने उन्हें एक बार फिर से इतिहास में दर्ज करा दिया जब नव भाटिया को एनबीए के हाल ऑफ फेम में शामिल कर लिया गया। इस पर उन्होंने कहा कि "मैनें बच्चे के रूप में अपनी मां से वादा किया था कि मैं अपनी पगड़ी नहीं उतारूंगा और आज यह हाल ऑफ फेम में शामिल हो गया है। जो आपको अलग बनाता है उन्हें बनाकर रखो, यह आपका सुपरपॉवर है। यह ताज है जो मैं रोज पहनता हूं। धन्यवाद, मां!"

बतातें चले कि हर सीजन में नव भाटिया रैपटर्स का खेल दिखाने के लिए अलग-अलग पहचान के बच्चों को बुलाने के लिए 300,000 यूएस डॉलर खर्च करते हैं। वह खेल के माध्यम से अलग-अलग बैकग्राउंड के बच्चों को साथ लाना चाहते हैं।


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