इस आदमी ने घर बैठे लॉकडाउन में बना डाला प्लेन, जानें कितने रुपये किए हैं खर्च
हम में से अधिकांश लोगों के लिए महामारी में लगाया गया लॉकडाउन उबाऊ था, क्योंकि हम कहीं बाहर नहीं जा सकते थे और न ही किसी से मिल सकते थे। लेकिन यह बात सभी के ऊपर लागू नहीं होती है, क्योंकि ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के अशोक अलीसेरिल थमारक्षण ने लॉकडाउन का बेहद अनोखे तरीके से इस्तेमाल किया।

अपने लॉकडाउन पीरियड का सही इस्तेमाल करते हुए अशोक ने एक 4-सीटर प्लेन बना डाला और उसमें उन्होंने अपने परिवार के साथ अलग-अलग देशों की यात्रा की थी। अशोक अलीसेरिल थमारक्षण वास्तव में केरल के रहने वाले हैं और वह साल 2006 में अपनी पत्नी के साथ यूके चले गए थे।

बता दें कि अशोक जो पेशे से एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं, उन्हें लॉकडाउन के दौरान अचानक ही एक विमान बनाने का विचार आया। उन्होंने ब्रिटिश सिविल एविएशन कंपनी से पायलट लाइसेंस भी हासिल किया। उन्होंने लंदन में अपने घर में एक अस्थायी वर्कशॉप का निर्माण किया और विमान पर काम करना शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार उन्होंने मई 2019 में अपने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया और उन्होंने नवंबर 2021 तक इसे खत्म कर दिया। लेकिन विमान बनाने के पीछे की वजह आपको हैरान कर देगी। बता दें कि किसी भी अन्य मेट्रो शहर की तरह, लंदन भी अपने ट्रैफिक जाम के लिए लोकप्रिय है।

दरअसल यह उन शहरों में से एक है, जहां सड़क पर हमेशा भीड़भाड़ रहती है। भीड़ से बचने के लिए अशोक ने अपने दम पर एक विमान बनाने का फैसला किया। अब वह ट्रैफिक ब्लॉक की चिंता किए बिना एक घंटे में लगभग 250 किमी का सफर तय कर सकते हैं।

इस प्लेन को उड़ाने के लिए उन्होंने पायलट के लाइसेंस के लिए तीन महीने की ट्रेनिंग भी ली है। उनकी पहली उड़ान 7 फरवरी 2022 को लंदन में हुई थी। अशोक ने 20 मिनट के लिए उड़ान भरी और इसके बाद उनके विमान में उन्होंने विभिन्न देशों की पारिवारिक यात्राएं 6 मई, 2022 को शुरू हुईं।

विमान बनाने के बाद अशोक, उनकी पत्नी अभिलाषा और उनकी दो बेटियां अपने विमान से कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। अशोक ने विमान का नाम अपनी छोटी बेटी के नाम पर रखा है। उन्होंने इस विमान का नाम G-DIYA रखा है, जहां ‘G' लंदन में विमानों के प्रतीक का प्रतिनिधित्व करता है।

अपना खुद का विमान बनाने से पहले, अशोक अपने पायलट का लाइसेंस हासिल करने के बाद यात्राओं के लिए छोटे 2-सीटर विमान किराए पर लेते थे। जब उनके परिवार का विस्तार शुरू हुआ, तो 2-सीटर विमान में उड़ान भरने का कोई मतलब नहीं था और तभी उन्होंने 4-सीटर विमान की तलाश शुरू की।

अपने शोध के दौरान उन्हें जोहान्सबर्ग स्थित स्लिंग एयरक्राफ्ट नाम की एक कंपनी मिली। अशोक ने उनके संयंत्र का दौरा किया और जल्द ही अपने विमान के निर्माण के लिए एक किट का ऑर्डर दिया। 4 सीटों वाले इस छोटे से विमान को बनाने में करीब 1.8 करोड़ रुपये की लागत आई है।


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