Independence day: आजादी के बाद नहीं थी भारत के पास खुद की कोई कार! आज बन गई दुनिया की टॉप ऑटो बाजार, जानें सफर

Indian Automobile Industry: भारत को आजाद हुए 78 साल हो गए। पूरा देश आजादी का उत्सव मना रहा है। आजादी के बाद भारत ने हर क्षेत्र में काफी प्रगति की है। देशवासियों की मेहनत और लगन की बदौलत आज हमारा देश दुनिया की टॉप इकोनॉमी में शुमार है। देश के विकास में अन्य सेक्टरों की तरह ऑटोमोबाइल्स सेक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

वर्तमान में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का कैपिटल लगभग 8 लाख करोड़ रुपए का है। देश की कुल GDP में ऑटोमोबाइल्स इंडस्ट्री का योगदान लगभग 7.1% का है। इतना ही नहीं इस इंडस्ट्री ने करीब 35 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया है।

India Auto Industry Remarkable Journey

ये बताते हुए हमें काफी खुशी हो रही है कि जिस भारत के पास आजादी के कई सालों तक खुद की कोई कार नहीं थी। वह आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो बाजार है। आइए आजादी से अबतक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के सफर पर नजर डालते हैं।

हिंदुस्तान मोटर्स से हुई शुरूआत: इंडियन ऑटो इंडस्ट्री की शुरूआत काफी धीमी गति से हुई थी। आजादी से पहले देश में ज़्यादातर वाहन इम्पोर्ट किए जाते थे। स्थानीय स्तर पर पहली बार साल 1942 में हिंदुस्तान मोटर्स ने इंग्लैंड की मॉरिस मोटर्स के साथ मिलकर काम करना शुरू किया।

Hindustan Ambassador

1947 में आजादी मिलने के बाद हिंदुस्तान मोटर्स ने एम्बेसडर कार लॉन्च किया था, जो मॉरिस मोटर्स द्वारा निर्मित मॉरिस ऑक्सफोर्ड सीरीज III पर बेस्ड थी। इसके बाद प्रीमियर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा इंजीनियरिंग ने भी भारत में ऑटो निर्माण शुरू किया।

ऑटो इंडस्ट्री के विकास के लिए सरकारी पहल: धीरे-धीरे भारत में कारों का निर्माण शुरू हो चुका था। लेकिन स्वतंत्रता मिलने के बाद सरकार ने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 1952 में पहला टैरिफ आयोग की स्थापना की।

Maruti 800

जिसके तहत विदेशी कंपनियों द्वार भारत में कारों की बिक्री पर टैक्स बढ़ गया। हालांकि इसका परिणाम हुआ कि जनरल मोटर्स, फोर्ड और रूट्स ग्रुप जैसी विदेशी कंपनियाँ भारत से पलायन कर गईं।

Maruti 800 के साथ क्रांतिकारी शुरूआत : 1980 के दशक में पुराने स्टाइल वाली गाड़ियां उपलब्ध थी, जो काफी महंगी भी थी। इस समस्या से निपटने के लिए सुजुकी के साथ मिलकर मारुति उद्योग लिमिटेड (अब Maruti Suzuki) ने Maruti 800 हैचबैक लॉन्च की थी।

उदारीकरण के बाद विदेशी ऑटो कंपनियों का आगमन: 1990 का दशक भारत की अर्थव्यवस्था के नजरिए से काफी उथल-पुथल वाला दौर रहा। यह, वही समय है जब देश में उदारीकरण की नीति अपनायी गई थी।

इसके बाद विदेशी कंपनियों के लिए रास्ता आसान हुआ। जिसके परिणामस्वरुप कई विदेशी ऑटो कंपनियों ने भारत में अपने कारोबार की शुरूआत की। कृषि और सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने से देश भर में कनेक्टिविटी धीरे-धीरे बढ़ रही थी।

जिसके चलते ऑटो कंपनियों के लिए भारत एक खुला बाजार बन गया। धीरे-धीरे विकास की गति आगे बढ़ी और साल 2022 में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाज़ार बन गया। आज भारत बिक्री के मामले में जापान से भी आगे है।

रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन ऑटो इंडस्ट्री ने अबतक 26.36 मिलियन वाहनों का निर्माण किया है। जबकि 5.62 मिलियन यूनिट वाहनों को विदेशी बाजारो में एक्सपोर्ट किया है। यह ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

13 मिलियन रोजगार क्रिएशन: इंडियन ऑटोमोटिव सेक्टर देश की सबसे ज्यादा नौकरी देने वाली सेक्टर भी है। यह सेक्टर 13 मिलियन लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 22 मिलियन लोगों को अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार प्रदान कर रही है।

इसके अलावा नए इनोवेशन जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड वाहन और ऑटो ड्राइविंग जैसे क्षेत्रों में इंडियन ऑटो सेक्टर लगातार प्रगति कर रही है। भारत सरकार ने भी ऑटो इंडस्ट्री को अपना समर्थन देने के लिए 'मेक इन इंडिया' और FAME योजना जैसी पहल शुरू की थी।

हालांकि वर्तमान में FAME सब्सिडी समाप्त कर दी गई है। लेकिन सरकार अभी भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रयास कर रही है। इसके अलावा रोड कनेक्टिविटी ने ऑटो इंडस्ट्री के विकास में अहम भूमिका निभायी है।

इंडियन ऑटो इंडस्ट्री का भविष्य: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का दावा है कि पांच साल के अंदर भारत दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन जाएगा। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का साइज 2026 तक 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

इसके अलावा 2022 और 2030 के बीच इलेक्ट्रिक व्हीलक का बाजार भी 49% की CAGR से वृद्धि होने का अनुमान है। भारतीय ऑटो इंडस्ट्री नए इनोवेशन से ग्रीन व्हीकल के विकास की दिशा में लगातार काम कर रही है। परिणामस्वरुप देश में EV का चलना काफी बढ़ गया है।

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Article Published On: Wednesday, August 14, 2024, 13:38 [IST]
English summary
Indian automotive sector contribution to economic growth since independence in hindi
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