लाल किले पर सेना की विंटेज जीप का जलवा: दिल्ली के सख्त नियमों से इसे क्यों मिली छूट?
लाल किले की परेड में आज सुबह सेना की एक विंटेज स्टाफ कार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गईं। इस ऐतिहासिक 'जीप वैगनियर' (Jeep Wagoneer) में दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) सवार थे। भूटान ने साल 1965 में यह कार तोहफे में दी थी, जिसे 2000 में भारतीय सेना के सेरेमोनियल फ्लीट में शामिल किया गया। आज भी यह कार अपने मॉडिफाइड इंजन के दम पर सड़कों पर पूरी शान से दौड़ती है।
दिल्ली में गाड़ियों की उम्र को लेकर सख्त नियम हैं, ऐसे में कई वाहन चालक सोच रहे हैं कि यह विंटेज कार सड़कों पर कैसे चल रही है। दरअसल, केंद्र सरकार ने सेना और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े वाहनों को अनिवार्य स्क्रैपेज नीति से साफ तौर पर अलग रखा है। आम जनता और राज्य परिवहन की गाड़ियां जहां 15 साल में रिटायर हो जाती हैं, वहीं सैन्य वाहनों को यह खास सुरक्षा हासिल है। यह छूट इसलिए दी गई है ताकि राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ी परंपराएं बनी रहें और सुरक्षा बलों के कामकाज में कोई रुकावट न आए।

सेना की विंटेज कार को छूट बनाम दिल्ली में गाड़ियों की उम्र के सख्त नियम
दूसरी ओर, दिल्ली में रहने वाले आम वाहन चालकों को गाड़ियों की म्याद से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है। यहां 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन अपने आप रद्द हो जाता है। अगर पुलिस ऐसी गाड़ियों को जब्त करती है, तो उन्हें बिना किसी नोटिस के सीधे स्क्रैप के लिए भेज दिया जाता है। हालांकि, 50 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को 'विंटेज कार' के रूप में रजिस्टर कराया जा सकता है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए सड़कों पर चलाने की सख्त मनाही है।
| कैटेगरी (श्रेणी) | दिल्ली में उम्र की सीमा | सड़क पर इस्तेमाल के नियम |
|---|---|---|
| रक्षा और सुरक्षा बल | छूट प्राप्त (Exempted) | पूर्ण परिचालन और सेरेमोनियल इस्तेमाल |
| सिविलियन विंटेज (50+ साल) | छूट (VA सीरीज) | केवल रैली और मेंटेनेंस के लिए अनुमति |
| सामान्य नागरिक वाहन | 10 साल (डीजल) / 15 साल (पेट्रोल) | बैन / सीधे स्क्रैप की जाएगी |
आम और विंटेज गाड़ियों पर राष्ट्रध्वज लगाने के नियम
राष्ट्रीय त्योहारों के मौके पर अक्सर लोग गाड़ियों पर तिरंगा लगाने या साइलेंसर मॉडिफाई कराने से जुड़े सवाल पूछते हैं। 'फ्लैग कोड ऑफ इंडिया' के मुताबिक, आम नागरिक अपनी निजी गाड़ियों पर तिरंगा नहीं लहरा सकते। यह अधिकार सिर्फ संवैधानिक पदों पर बैठे अति विशिष्ट व्यक्तियों और सेना के चुनिंदा शीर्ष अधिकारियों के पास ही है। इसके अलावा, वाहन चालकों को मॉडिफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ट्रैफिक पुलिस तेज आवाज वाली गाड़ियों पर भारी जुर्माना लगाती है।
सेना की यह विंटेज स्टाफ कार कूटनीतिक इतिहास और सैन्य परंपरा का एक गौरवशाली प्रतीक है। हालांकि, रक्षा बलों को मिली इस विशेष छूट के बावजूद आम वाहन चालकों के लिए स्थानीय परिवहन नियमों का पालन करना अनिवार्य है। प्रदूषण मानकों और वाहन कानूनों का ध्यान रखकर ही हम स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों को सुरक्षित और गरिमामय बना सकते हैं।


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