नितिन गडकरी: पांच साल में देश बनेगा ऑटोमोबाइल निर्माण का केंद्र, तेल आयात पर भी कम होगी निर्भरता
भारत बहुत जल्द ही दुनिया भर में ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पसंदीदा केंद्र बन सकता है। न्यूज 18 को दिए गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में नितिन गडकरी के कहा कि सरकार अगले पांच सालों में भारत को ऑटोमोबाइल के लिए नंबर 1 निर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र के कारोबार को 7.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 लाख करोड़ रुपये करना है।

गडकरी ने यह भी कहा कि सरकार कच्चे ईंधन के आयात को कम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कच्चे ईंधन और और पेट्रोलियम के जगह बायो एथेनॉल, सीएनजी, बायो एलएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, गडकरी ने दावा किया कि दो साल के भीतर, अच्छे विनिर्माण संख्या प्राप्त करने से, इलेक्ट्रिक दो, तीन और चार पहिया वाहनों और यहां तक कि बसों की लागत पेट्रोल और डीजल वाहनों के बराबर हो जाएगी।

ग्रीन एनर्जी पर सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बारे में बताते हुए गडकरी ने कहा कि लिथियम आयन बैटरी के अलावा हम जिंक आयन, सोडियम आयन और एल्युमीनियम आयन बैटरियों को भी विकसित करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ग्रीन हाइड्रोजन का है और यह भविष्य के परिवहन क्षेत्र में ईंधन की मुख्य भूमिका में होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात की भी योजना बना रही है।

हाल ही में नितिन गडकरी ने संसद में अपने एक भाषण में बताया था कि देश की सरकारी दफ्तरों और एजेंसियों में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा था कि 4 फरवरी 2022 तक सरकारी कंपनियों द्वारा 5,384 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

नितिन गडकरी देश में फ्लेक्स इंजन वाहनों के निर्माण को लेकर जल्द ही निर्देश जारी करने की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार अगले छह महीनों के भीतर सरकार फ्लेक्स इंजन वाहनों के निर्माण के संबंध में दिशानिर्देश जारी करेगी। गडकरी का कहना है कि वाहन निर्माताओं को ऐसे वाहनों का विकल्प देना चाहिए जो 100 प्रतिशत पेट्रोल या बायो-इथेनॉल पर चल सकें। ऐसे वाहनों को अनुमति देने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि फ्लेक्स फ्यूल इंजन की तकनीक आसानी से उपलब्ध है, अगर वाहन कंपनियां चाहें तो भारत की ऑटो इंडस्ट्री क्लीन फ्यूल की तरफ एक बड़ा कदम उठा सकती हैं।

भारत सरकार ने ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए फ्लेक्स फ्यूल के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। इसके लिए सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। 8 मार्च 2021 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर E20 ईंधन के उपयोग को मंजूरी दे दी है। E20 ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।

ये हैं फ्लेक्स फ्यूल के फायदे
फ्लेक्स फ्यूल से भारत में हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के इथेनॉल का कारोबार किया जा सकता है। इथेनॉल के उपयोग से पेट्रोल का आयात कम होगा और करोड़ों रुपये के राजस्व की बचत भी की जा सकेगी। इसके अलावा इथेनॉल मिश्रित फ्लेक्स फ्यूल के इस्तेमाल से वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा।

ब्राजील, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स फ्यूल पर चलने वाले वाहनों का उत्पादन किया जाता है। यहां ग्राहक 100 प्रतिशत पेट्रोल या 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों का विकल्प चुन सकते हैं।

पेट्रोल से सस्ती मिलेगी इथेनॉल फ्यूल
बायो फ्यूल यानी इथेनॉल की कीमत पेट्रोल से 30-35 रुपये सस्ती हो सकती है। पूरी तरह इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों पर पेट्रोल की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर नहीं पड़ेगा। नितिन गडकरी ने कहा है कि इथेनॉल को तैयार करने के लिए हमारे देश में पर्याप्त मात्रा में मक्के, गन्ने और गेहूं की खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर वाहन कंपनियां फ्लेक्स इंजन वाहनों को उतारें, तो हमें सस्ते ईंधन का फायदा मिलेगा साथ ही प्रदूषण से लड़ने में भी मदद मिलेगी।


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