डीजल और बिजली भूल जाइए! अब देश में चलेंगी Hydrogen Trains, जानें कब होगी शुरुआत; बाकी ट्रेनों से कितनी अलग
Hydrogen Train: भारत में दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। समय के साथ भारतीय रेलवे (Indian Railway) लगातार प्रगति कर रही है। कोयला इंजन से डीजल, फिर इलेक्ट्रिक के बाद अब रेलवे एक और धमाका करने जा रही है। जी हां, भारतीय रेलवे जल्द हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें लॉन्च करने वाली है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
ईटी नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे जीरो कार्बन एमिशन लक्ष्य के साथ लगातार नए इनोवेशन कर रहा है। हाइड्रोजन रेल भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अगले साल शुरू हो सकती है।

भारतीय रेलवे इस साल के अंत तक इसका प्रोटोटाइप बनाकर टेस्टिंग भी शुरू करने वाली है। बता दें, स्वीडन, जर्मनी, फ्रांस और चीन के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला 5वां देश बन जाएगा।
कैसे चलती है हाइड्रोजन फ्यूल वाली ट्रेनें : हाइड्रोजन फ़्यूल से चलने वाली ट्रेन कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन जैसे प्रदूषण युक्त कारकों का उत्सर्जन नहीं करती। इस ट्रेन को चलाने के लिए डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स लगाए जाते हैं।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स एक केमिकल रिएक्शन के जरिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को बदलकर इलेक्ट्रिक पावर जेनरेट करती है। इस पावर की मदद से ट्रेन को चलाया जाता है। रेलवे इसके लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है।
35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना: भारतीय रेलवे के मुताबिक अगले साल 35 से अधिक हाइड्रोजन फ्यूल वाली ट्रेनें चलायी जाएंगी। रिपोर्ट के मुताबिक पहली हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली डिवीजन को मिलेगी और जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी।
हेरिटेज रूट पर ज्यादा ट्रेनें: भारतीय रेलवे के मुताबिक ज्यादातर हाइड्रोजन फ्यूल वाली ट्रेनें हेरिटेज और पहाड़ी रास्तों पर चलायी जाएगी। इन ट्रेनों के परिचालन से हेरिटेज मार्ग पर प्रदूषण कम होगा।
रिपोर्ट की माने तो Hydrogen Trains का परिचालन दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कालका-शिमला रेलवे, कांगड़ा वैली और नीलगिरी माउंटेन जैसे रूटों पर किया जाएगा। इन रूटों पर आवश्यक इन्फ्रा का विकास किया जाएगा।
2800 करोड़ का बजट: भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 2800 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा हेरिटेज रूट पर हाइड्रोजन रेल से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भी अलग से 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
हालांकि नए Hydrogen ट्रेन का डिजाइन कैसा होगा, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। माना जा रहा है कि ये 6 कोच वाली ट्रेनें होंगी और इनमें कई एडवांस फीचर्स भी देखने को मिलेंगे।
कुल मिलाकर देखा जाए तो रेलवे फ्यूल सोर्स के रूप में हाइड्रोजन का इस्तेमाल कर ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। इससे लागत में भी कमी आएगी और प्रदूषण भी कम होगा।


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