अब 30 मिनट में पहुंचेंगे चेन्नई से बेंगलुरु, IIT मद्रास की इस ‘हाइपरलूप रेल’ से सच होगा सपना!

आप कल्पना कीजिए कि क्या चेन्नई से बेंगलुरु से 350 किलोमीटर की दूरी तय केवल 30 मिनट में रेलमार्ग से तय की जा सकती है? जी हां आने वाले दिनों में ये सच होने वाला है।

IIT मद्रास के छात्र एक ऐसे 'हाइपरलूप रेल' प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिससे की घंटों की यात्रा मिनटों में हो सकेगी। दरअसल IIT मद्रास की एक टीम प्रोटोटाइप हाइपरलूप पॉड का उपयोग करते हुए चेन्नई से बेंगलुरु तक की 350 किमी की यात्रा 25 मिनट में पूरा करने की योजना बना रही है।

IIT Madras Avishkar Hyperloop Pod

यातायात को सुलभ बनाने की दिशा में हाइपरलूप पॅाड की अवधारणा पर दुनिया भर के लोगों की दिलचस्पी है। बता दें कि एडिनबर्ग में आयोजित Space X इंटरनेशनल हाइपरलूप पॉड प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने के लिए भारत की ओर से यह एकमात्र सबमिशन था।

इस समारोह में माॅडल की खूब सरहाना हुई थी और इसने पुरस्कार भी जीता है। बता दें कि दुनिया भर के सभी देश हाइपरलूप को परिवहन का भविष्य मान रहे हैं। हाइपरलूप पॅाड मॅाडल हवाई जहाज की जितनी गति से यात्रा करने में सक्षम है।

इसके साथ ही इससे विमान जितना अधिक ध्वनि और वायु प्रदूषण भी उत्पन्न नहीं होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाइपरलूप पॉड्स वैक्यूम ट्यूबों की मदद से गति करते हैं। इनकी अनुमानित गति लगभग 1200 किमी/घंटा तक की है।

वहीं ये प्रदूषण मुक्त भी है क्योंकि इससे बिलकुल भी कार्बन उत्सर्जित नहीं होता है। इस प्रोजेक्ट को अगर शहरी क्षेत्रों की सीमाओं के भीतर बनाई जाती है, तो मेट्रो की तरह यात्रियों का काफी समय बच सकता है।

IIT Madras Avishkar Hyperloop Pod

IIT मद्रास का विजनरी अविष्कार हाइपरलूप प्रोजेक्ट ने आंशिक वैक्यूम ट्यूब में हाई-स्पीड पॉड के सपने को हकीकत में बदल दिया है। इस प्रोजक्ट से जुड़े एक सदस्य ने कहा कि "इस साल के अंत तक हम प्रोजेक्ट के वैलिडेशन के करीब पहुंच जाएंगे।

उन्होंने कहा कि " हम जिस गति से काम कर रहे हैं इस गति से जारी रखें, तो अगले 10 वर्षों में पहली हाइपरलूप रेल बनाने में सक्षम हो जाएंगे।" हालांकि इस प्रोजक्ट को अनुमानित समय से भी कम वक्त में सफलता मिल सकती है।

IIT Madras Avishkar Hyperloop Pod

दुनिया के मशहूर बिजनैसमैन एलोन मस्क ने भी हाइपरलूप सिस्टम को इंट्रोड्यूस किया है। यह आंशिक वैक्यूम वातावरण में चुंबकीय फील्ड की मदद लेती है। यह डिज़ाइन पॉड्स को एयर रेसिडेंस के कारण 1,000 किमी प्रति घंटे तक की गति प्राप्त करने की अनुमति देता है।

IIT मद्रास की आविष्कार टीम ने विश्व स्तर पर न केवल पॉड बनाया है बल्कि इस हाइपरलूप अवधारणा को वैलिडेट करते हुए इसका सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया है।

IIT Madras Avishkar Hyperloop Pod

बता दें कि टीम ने हाइपरलूप तकनीक से संबंधित छह पेटेंट के लिए आवेदन किया था। जिसमे हाइपरलूप टेक्नोलॅाजी, पॉड लेविएशन, ट्यूब निर्माण और बैटरी कूलिंग जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

टीम ने इस प्रोजक्ट के शुरुआती चुनौतियों पर भी चर्चा की थी। एक इंटरव्यू में IIT की इस टीम ने कहा था कि, "वैक्यूम के अंदर एक एयर कंडीशनर को कैसे फंक्शन किया जाए। इसके अलावा रेल का वेंटिलेशन और सीटिंग अरेंजमेंट जैसी चीजें चुनौतियां हैं। "

वहीं पिछले साल इस परियोजना के लिए रेल मंत्रालय ने IIT मद्रास का समर्थन करते हुए रिसर्च वर्क के लिए 8.34 करोड़ रुपये दिए थे।

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Article Published On: Wednesday, October 11, 2023, 12:58 [IST]
English summary
Iit madras avishkar hyperloop train chennai to bengaluru in 30 minutes read this invention in hindi
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