बेरोजगार महिला ने बेटे से मिलने के लिए किया 1800 किलोमीटर का सफर, लग गये इतने दिन
देश में पिछले कुछ महीने से लॉकडाउन लगाया गया था जिस वजह से कई लोगों को अपने काम से हाथ धोना पड़ा है। इसमें एक महिला भी शामिल है जो कि अब बेरोजगार व बेघर भी हो गयी है। वह अब अपने 5 साल के बेटे व परिवार से बहुत दूर हो गयी है।

लेकिन सोनिया दास नाम की महिला का हौसला टुटा नहीं और वह अपने बेटे से मिलने के लिए अपनी दोस्त साबिय बानो के साथ पुणे से मुंबई के रास्ते जमशेदपुर के लिए निकल पड़ी और बीते शुक्रवार वह अपने घर भी पहुँच गयी, थोड़ी देर बाद अपने परिवार को दूर से देखने के बाद उन्हें क़्वारन्टाइन सेंटर में डाल दिया गया।

वहां पहुंचने के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने दोनों का किया सैंपल ले लिया, साबिया को जहां बुखार हो गया था वहीं सोनिया को सर्दी-खासी व साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। सोनिया ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे व परिवार वालों को बालकनी से देखा, उसके बाद टेल्को क़्वारन्टाइन सेंटर में शिफ्ट हो गयी।

सानिया का कोविड-19 टेस्ट नेगेटिव आने के बाद प्रशासन ने उनके बेटे से मिलने का इंतजाम कर दिया। पुलिस ने बताया कि साबिया व सोनिया को उनकी मर्जी के हिसाब से होम क़्वारन्टाइन में डाल दिया गया है और सुखा राशन प्रदान कर दिया गया है।

मुंबई में रेंट ना चुका पाने के कारण सोनिया को पुणे में साबिया के साथ रहना पड़ रहा था। उनके सफर के बारें में बतातें हुए उन्होंने कहा कि 1800 किलोमीटर के स्कूटर के सफर में कोविड-19 से जूझ रहे राज्य से गुजरने के दौरान वह दस पेट्रोल पंप व तीन ढाबे पर रुके।

चार दिन के हाईवे के इस सफर पर उन्हें सुरक्षा को लेकर कोई भी डर महसूस नहीं हुआ। सोनिया ने बताया कि 'हमने अधिकतर बड़ा-पाव व पानी पर गुजारा किया। बहुत से लोगों ने हमे लड़का समझा क्योकि हमारा चेहरा हेलमेट से ढका था और हम शर्ट व पैंट पहने हुए थे।'

उन्होंने आगे कहा कि कई लोकल लोग हमारी मदद के लिए सामने आये और हमें खाना व पानी दिया। एक व्यक्ति जो हमें महाराष्ट्र बॉर्डर पर मिला था जो साबिया को हमारी सुरक्षा को लेकर पूछताछ करता रहता था। जमेशदपुर के डीसी सूरज कुमार के परमिशन मिलने के बाद ही उन्हें जिले में इजाजत मिली थी।

सोनिया ने जमशेदपुर के लिए निकलने से पहले महाराष्ट्र व झारखंड दोनों सरकार से मदद मांगी थी लेकिन नहीं मिली। उन्होंने सोनू सूद को भी ट्वीट किया था लेकिन कोई मदद उपलब्ध नहीं हो पायी थी। इसलिए उन्होंने अपने से 20 जुलाई को वापस जमशेदपुर जाने का फैसला लिया था।


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