कोर्ट ने सड़कों पर गड्डों के लिए महानगर निकायों को लगाई जोरदार फटकार, कहा- जल्द हो मरम्मती का काम
महानगरों में सड़कों की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुंबई और बेंगलुरु हाईकोर्ट ने इन शहरों से संबंधित नगरीय निकायों को फटकार लगाई है। गौरतलब है कि हाल ही में मुंबई हाईकोर्ट ने बृहनमुंबई नगर निगम (बीएमसी) और बेंगलुरु हाईकोर्ट ने ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) से संबंधित शहरों में सड़कों की खराब स्थिति को लेकर सवाल खड़े किये हैं।

महानगरों में सड़कों की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुंबई और बेंगलुरु हाईकोर्ट ने इन शहरों से संबंधित नगरीय निकायों को फटकार लगाई है। गौरतलब है कि हाल ही में मुंबई हाईकोर्ट ने बृहनमुंबई नगर निगम (बीएमसी) और बेंगलुरु हाईकोर्ट ने ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) से संबंधित शहरों में सड़कों की खराब स्थिति को लेकर सवाल खड़े किये हैं।

मुंबई हाईकोर्ट ने बीएमसी को मुंबई महाननगर में 20 सबसे खराब सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है। मुंबई हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़कों को भरने का काम एक सप्ताह के भीतर शुरू हो जाना चाहिए। कोर्ट ने मुंबई में सड़कों की जर्जर स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बीएमसी एक संसाधन संपन्न नगर पालिका है। उन्हें टैक्स के पैसों का खर्च समाज के हित में करना चाहिए। कोर्ट ने बीएमसी को जल्द से जल्द खराब सड़कों की मरम्मती का काम शुरू करने का निर्देश दिया है।

वहीं बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को भी बेंगलुरु हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिया है। उच्च न्यायलय ने बीबीएमपी को अंतिम चेतावनी देते हुए सड़कों की मरम्मती के लिए समय सीमा निर्धारित करने का आदेश दिया। न्यायलय ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "बीबीएमपी को बताना चाहिए कि वे सड़कों पर गड्ढे भरने का काम कब तक पूरा कर लेंगे।"

बेंगलुरु हाईकोर्ट ने बीबीएमपी पर गड्ढों के आंकड़ों को छिपाने और गलत आंकड़ों की रिपोर्ट देने के लिए भी जमकर फटकार लगाई। बीबीएमपी ने उच्च न्यायालय से कहा था कि शहर की सड़कों पर केवल 221 गड्ढे ही हैं। इसपर न्यायालय ने फटकार लगाते हुए कहा कि बीबीएमपी को ईमानदारी से आंकड़ों को साझा करना चाहिए। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बीबीएमपी ने स्वीकार किया कि बेंगलुरु की सड़कों पर 25,000 से भी ज्यादा गड्ढे हैं।

सड़कों की खराब निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव में कमी सड़कों पर गड्ढों के बनाने की सबसे बड़ी वजह हैं। परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 से 2020 के बीच सड़कों पर गड्ढों से देश भर में कई हादसे हुए जिसमें कुल 5,626 लोगों की जान चली गई।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 के दौरान सड़क हादसों में कुल 1,20,806 लोगों की मौत हुई। इन हादसों के अधिकतर शिकार कामकाजी वर्ग के युवा थे। रिपोर्ट के कहा गया कि सड़क दुर्घटनाओं के कुल मामलों में 43,412 (35.9%) हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए, जबकि राज्य राजमार्गों पर 30,171 (25%) हादसे हुए। वहीं अन्य सड़कों पर 47,223 (39.1%) दुर्घटनाएं हुईं।

इन सड़क हादसों में मरने वालों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने 2020 के सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि मरने वाले 18-60 आयु वर्ग के लोगों में 87.4 प्रतिशत कामकाजी थे।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सड़क हादसों में शामिल वाहन श्रेणियों में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की थी, जबकि कार, जीप और टैक्सी जैसे हल्के वाहन दूसरे स्थान पर रहे। कुल मृत्यु दर में दोपहिया सवारों की हिस्सेदारी 2020 के दौरान सबसे ज्यादा (43.5%) रही। सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए 17.8 प्रतिशत लोग पैदल चलने वाले थे।

सड़क हादसों की रिपोर्ट (2020) में अधिक रफ्तार में गाड़ी चलाने को (ओवरस्पीडिंग) को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बताया गया। अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने से 69.3% दुर्घटनाएं हुईं, वहीं गलत साइड में ड्राइविंग से 5.6% दुर्घटनाएं हुईं।


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