भारत के ई-साइकिल बिजनेस को हो सकता है बड़ा नुकसान! जानें हीरो साइकिल के एमडी ने क्यों कहा ऐसा
देश में क्लीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक बाइक, स्कूटर और कार के साथ-साथ लगभग सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्र और राज्य सरकारें प्रोत्साहन दे रही है। वहीं दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक साइकिल को इन सभी योजनाओं से बाहर रखा गया है। हीरो साइकिल के एमडी पंकज मुंजाल का कहना है कि इलेक्ट्रिक बाइसिकल उद्योग को सरकार की मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी से बाहर रखा गया है, जिससे इस उद्योग को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

इलेक्ट्रिक साइकिल उद्योग के साथ भेदभाव
पंकज मुंजाल ने इसके लिए इलेक्ट्रिक साइकिलों को लेकर सरकारों की दोहरी नीति को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की फेम-2 पॉलिसी और हाल ही में लॉन्च की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम में इलेक्ट्रिक बाइसाइकिल उद्योग को शामिल नहीं किया गया है और न ही इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने वाली कंपनियों के लिए कोई प्रोत्साहन की घोषणा की गई है।

कई देशों से मिल रही है कड़ी चुनौती
उन्होंने बताया कि दोहरी नीति के वजह से अगले 5 सालों में भारत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के इलेक्ट्रिक बाइसाइकिल एक्सपोर्ट आर्डर को गंवा सकता है। भारत की इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने वाली कंपनियां कई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती चीन से मिल रही है जो भारत की ई-साइकिल बिजनेस को हथियाना चाहता है।

उन्होंने बताया कि हम गलत पॉलिसी के चलते यूरोपियन यूनियन के बाइसिकल सप्लाई को चीन और फार ईस्ट के हाथो हार रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत को बाइसिकल उद्योग पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी को विकसित देशों की तरह या फिर जेनेरलाइज्ड परेफरेंस ऑफ कन्ट्रीज की तरह शून्य करना चाहिए जो कि अभी 14 प्रतिशत है।

हीरो साइकल्स ने किया 1000 करोड़ का निवेश
हीरो साइकिल ने तीन साल पहले इलेक्ट्रिक साइकिल का निर्माण शुरू किया था और मेक-इन-इंडिया पहल के तहत कंपनी ने ई-साइकिल बनाने के लिए एक नए कारखाने में 300 करोड़ से अधिक का निवेश किया। इसके अलावा कंपनी ने वेंडर बेस बनाने के लिए 400 करोड़ रुपये और यूनाइटेड किंगडम में एक्सपोर्ट हब बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये का निवेश किया था ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती बनाई जा सके।

इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने की मांग
पंकज मुंजाल ने आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि यूरोपियन यूनियन में ई-साइकिल का बिजनेस प्रतिवर्ष 5 बिलियन यूरो का है जो कि भारत से 50 गुना अधिक है। यूरोप में ई-साइकिल का बाजार अगले 10 सालों में 5 गुना बढ़ जाएगा। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल निर्माता है। अगर हम इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करें तो यूरोप में साइकिल का निर्यात बढ़ा सकते हैं।


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