वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस से भिड़े भाजपा नेता, पुलिस ने किया एफआईआर
भारतीय संसद में सरकार मोटर व्हीकल अधिनियम को पास करा चुकी है। इस बिल पर कई विवाद भी हुए है। कई लोगों ने इसमें संसोधन की मांग की है। क्योंकि सरकार ने इसमें कई कड़े कानून को भी शामिल किया है।

लेकिन वहीं अभी इसे राज्यसभा से पास होना बाकि है। परंतु इन सबके बीच जो खबर आ रही है। वो लोकतंत्र में कानून बनाने वाले नेताओं पर सवाल उठाती है। सवाल यह कि ये लोग जिन कानूनों को लोकसभा में बनाते है, क्या वह सिर्फ आम आदमियों के लिए ही है।

संसद में लाया गया हर एक विधेयक क्या सिर्फ देश के उन नागरिकों के लिए है, जो आर्थिक रूप से कमजोर है। क्या इन कानूनों का नेताओं, अफसरों पर कोई प्राभाव नहीं पड़ना है। ये सारे सवाल इसलिए है क्योंकि पिछले कई दिनों से नेताओं और अफसरों द्वारा यातायात नियमों की माखौल बनाने की खबर आ रही है।

अभी कुछ वक्त पहले ही महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के अफसरों द्वारा ट्रैफिक नियमों की अहवेलना की खबर तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। इन दोनों घटनाओं में अभियुक्त को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। साथ ही जुर्माने का भुगतान भी करना पड़ा था।

वहीं अभी यह घटना ताजा ही थी कि कानून बनाने वाली सरकार के एक नेता ने ट्रैफिक नियमों से खुद को ऊपर बता दिया है। यह घटना योगी सरकार के रामराज्य में घटित हुई है। कहने को तो यहां सब अच्छा है। योगी और मोदी सरकार में राज्य तेजी से विकास कर रहा है।

टोयोटा यारिस: होंडा सिटी को टक्कर देने आयी यह शानदार कार, अभी करें टेस्ट ड्राइव
उत्तर प्रदेश के शहर जापान की परिकल्पना के साथ बनाए जा रहे है। काशी क्योटो बन रहा है, तो रायबरेली रोम। सरकार की माने तो वो दिन दूर नहीं जब आप भारत में ही यूरोपियन शहरों का अनुभव करेंगे।

लेकिन यह सब कैसे होगा। इस पर सरकार कुछ नहीं कहती है। जिस तरह के हालात है, उसमें तो मुमकिन नहीं दिखता है। यह तब और मुश्किल लगने लगता है, जब राज्य के नेता ही संसद, संविधान और किसी भी विधेयक से खुद को ऊपर समझने लगते है।

उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद की घटना इसी का उदहारण है। यहां बीजेपी के नेता अरविंद सिंह है। यह महाशय खुद को कानून से ऊपर मानते है। शायद इसलिए इन्हें हेलमेट नहीं पहनने पर बीच सड़क पर बदतमीजी करने का हक मिला है।

दरअसल यह घटना मुरादाबाद के सिविल लाइन में ट्रैफिक चेक पोस्ट की है। यहां नेताजी अपने बच्चों को स्कूल से लेकर आ रहे थे। लेकिन चेक पोस्ट पर उनका सामना ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों से हो जाता है।

पुलिस ने उनसे विवरण मांगा, तब वे बताते है कि वह भाजपा के स्थानिय सर्कल के नेता है। लेकिन पुलिस वालों ने उनसे हेलमेट और बाकि कागजातों के बारे में पूछना जारी रखा। इस पर नेताजी का गुस्सा बढ़ता गया और उन्होंने पुलिस अधिकारियों के लिए गाली देना शुरु कर दिया।

अरविंद सिंह का कहना था कि पुलिस वालों ने उनके वाहन से बिना पूछे चाबी निकाल लिया है। उनके बार-बार चाबी मांगने पर भी पुलिस ने बाइक को जब्त कर लिया है। पुलिस ने भाजपा नेता की बाइक जब्त कर ली है।इसके साथ ही उन्हें घर जाने के लिए एक वैक्लपिक वाहन की व्यवस्था करके दी गई है। यह हंगामा काफी देर तक चला है। पुलिस और राजनेता के बीच चले इस हंगामें को देखने के लिए शहर को लोग एकत्र हो गए थे, कुछ ने तो वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है।

मुरादाबाद के नेता अरविंद सिंह की बाइक को पुलिस ने जब्त कर लिया है। साथ ही पुलिस ने उनपर चालान भी किया है। हालांकि वीडियो में यह भी सुना जा सकता है कि अरविंद सिंह पुलिस से ऑन स्पॉट चालान की मांग कर रहे है।

लेकिन पुलिस ने नेता के खिलाफ कानून तोड़ने और पुलिसवालों के साथ बदत्तमिजी का मामला दर्ज किया है। वहीं इस पर बीजेपी नेता अरविंद सिंह का कहना है कि वह स्कूल से बच्चा लेकर वापस आ रहे थे।उन्हें चौकी पर रोका गया और उनसे हेलमेट के बारे में पूछा गया। तब अरविंद ने जवाब दिया कि हेलमेट नहीं है और वे मौके पर ही चालान जारी कर सकते हैं। हालांकि, पुलिसकर्मी ने उसकी बाइक से चाबी निकाल ली और उसे गालियां देने लगा।

वहीं इस पूरे घटना पर बात करते हुए मुरादाबाद के एसीपी सिटी अंकित मित्तल बताते है कि बीजेपी नेता को नियमित जांच के लिए रोका गया था। लेकिन उन्हें रोकने पर उन्होंने पुलिस कर्मियों को गालियां देना शुरू कर दिया था। इस पर कारवाई करते हुए पुलिस ने बाइक को जब्त कर लिया और नेता के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।

बीजेपी नेता द्वारा ट्रैफिक नियम और पुलिस के साथ बदत्तमीजी पर विचार
भारत में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लोग अपने आर्थिक या समाजिक प्रभाव को दिखाकर खुद को कानून से ऊपर समझने लगते है। ऐसे लोगों को बाबा साहब के संविधान की कॉपी पढ़ानी चाहिए, जिसमें यह साफ लिखा है कि इस देश के सभी नागरिक एक समान है। साथ ही उन्हें इस किताब के अनुसार ही चलना होगा।
इस तरह की घटनाएं जब किसी रसूखदार या ऊंची पदों पर बैठे लोगों द्वारा बार-बार दोहराई जाती है, तो यह देश के आम नागरिकों की छवि को खराब करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन ऊंची पदों पर बैठे लोगों की नियुक्ति में कहीं न कहीं आपका और हमारा योगदान भी होता है।


Click it and Unblock the Notifications