अब हरियाणा सरकार ने भी की ई-वाहन नीति की घोषणा, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर मिलेगी सब्सिडी
हरियाणा इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा करने वाला भारत का नवीनतम राज्य बन गया है। हरियाणा सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी देने का फैसला किया है। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को ईवी नीति का ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार ई-वाहनों की मांग को बढ़ावा देने के प्रयास में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को सब्सिडी प्रदान करेगी।

उन्होंने बढ़ते प्रदूषण को रोकने में सभी नागरिकों के योगदान की अपील की और निजी वाहन खरीदने के बजाय कारपूलिंग सिस्टम की भी वकालत की। गुरुग्राम में प्रदूषण को रोकने में अपने प्रयास के तहत हरियाणा सरकार सीएनजी बसों को प्रोत्साहन दे रही है। हरियाणा सरकार अब मुख्य शहरों में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ऑटो को चलाने की तैयारी कर रही है।

दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित भारत भर में कई राज्य सरकारों ने पहले ही अपनी संबंधित ईवी नीतियों की घोषणा कर दी है। इनमें से कुछ नीतियां इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण को बढ़ाने और उन्हें किफायती बनाने के मकसद को पूरा करती हैं, जबकि कुछ बाजार में ई-वाहनों की मांग को बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति का मुख्य लक्ष्य सब्सिडी और छूट के जरिये लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के बदले इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रेरित करना है। राज्य सरकारों की सब्सिडी केंद्र की फेम-2 (FAME-2) योजना से मिलने वाली रियायतों के अतरिक्त दी जाती हैं।

वर्तमान में, 50 प्रतिशत से ज्यादा राज्यों ने अपनी संबंधित ईवी नीति की घोषणा कर दी है। ईवी नीति के अंतर्गत यह सब्सिडी रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट के तौर पर दी जाती है। इसके अलावा राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक वाहन के बैटरी की क्षमता के अनुसार अतरिक्त छूट देती है। लोन के जरिये ई-वाहन खरीदने पर बैंक द्वारा कम ब्याज दर पर फाइनेंस किया जाता है। वहीं ई-वाहन बनाने वाली कंपनियों को सरकारें टैक्स में छूट और कई अन्य तरह की रियायतें देकर प्रोत्साहित करती है।

ई-वाहनों पर नहीं देना होगा रजिस्ट्रेशन चार्ज
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की अपनी नीति के तहत भारत सरकार ने अब देश में रजिस्टर होने वाले सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल शुल्क से मुक्त कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहक रजिस्ट्रेशन शुल्क की बचत कर सकते हैं।

केंद्र सरकार की तरफ से यह फैसला तब आया है जब देश भर में ईंधन की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। सरकार ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अधिक लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

सरकार ने पिछले कुछ सालों से देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी से विकास किया है। इसके लिए सरकार निजी कंपनियों और वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर काम कर रही है। केंद्र सरकार फेम-2 (FAME-2) स्कीम की मदद से इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाले रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर छूट दे रही है ताकि इन्हे ग्राहकों के लिए किफायती बनाया जा सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों की कितनी है डिमांड?
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की बात करें तो, वित्तीय वर्ष 2020 में कुल 2,95,497 यूनिट इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए थे। वहीं, वित्तीय वर्ष 2021 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 19 फीसदी गिर कर 2,38,120 यूनिट रह गई। देश भर में कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए के लॉकडाउन के कारण बिक्री प्रभावित हुई है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की मांग का बड़ा हिस्सा वित्त वर्ष 2021 में लो-स्पीड मॉडल (1,03,000 यूनिट) से आया, जबकि इसी अवधि में 40,836 हाई-स्पीड मॉडल खरीदे गए।


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