गुजरात हाईकोर्ट का फैसला मॉल और मल्टीप्लेक्स में नहीं लगेगा पार्किंग शुल्क
दुनियाभर में किसी भी मल्टीप्लेक्स या मॉल के पास चले जाइए आपको वाहन पार्क करने के लिए शुल्क देना ही पड़ता है। शायद यह एक अटल सत्य है, जिसे कभी बदला नहीं जा सकता है। आपके पास कार या बाइक है तो फिर समझ जाइए कि आपकी जेब पर शॉपिंग के खर्चे के बोझ के आलावा वाहन पार्किंग शुल्क की मार पड़ने वाली है।

क्योंकि भारत में किसी भी राज्य में चले जाएं पार्किंग स्पेस के लिए मल्टीप्लेक्स या शॉपिंग मॉल पैसे वसूल करते है। लेकिन देश में एक राज्य ऐसा भी है, जहां अब पार्किंग शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

बुधवार को गुजरात हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग कॉम्पलेक्स या इस तरह की कोई भी संस्था ग्राहकों से पार्किंग शुल्क नहीं मांग सकती है। मल्टीप्लेक्स और शॉपिंग कॉम्पलेक्स को ग्राहकों के वाहन पार्किंग के लिए जगह देना होगा।

गुजरात हाई कोर्ट का यह फैसला कंप्रिहेंसिव जनरल डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन के अंतर्गत लिया गया है। यह फैसला चीफ जस्टिस अंनत दवे और बिरेन वैश्नव के नेतृत्व वाली बेंच ने दिया है।

हाई कोर्ट ने यह फैसला गुजरात बिल्डिंग और टाउन प्लानिंग कानून के विश्लेषण के दौरन दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि " बिल्डिंग के मालिक की यह जिम्मदारी बनती है की वो अपने ग्राहकों को पार्किंग के लिए जगह मुहैया कराएं, वो भी बिना किसी शुल्क की मांग करते हुए।

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गुजरात टाउन प्लानिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट एक्ट 1976 और गुजरात नगपालिका एक्ट 1963 के प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी तरह की पार्किंग चार्ज नहीं किया जाना है। साथ ही इसके लिए मॉल और मल्टीप्लेक्स को अलग से ड्युटी प्रदान की जाती है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अपने वाहन की सुरक्षा के लिए पार्किंग शुल्क देने के लिए बाध्य नहीं है।

यह बेंच शहर के रूचि मॉल प्राइवेट लिमिटेड और अन्य मॉल मालिकों की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह मांग की गई थी राज्य सरकार को पार्किंग शुल्क विनयमित करने के लिए एक नीति बनानी चाहिए।

आपको बता दें कि पिछले वर्ष मॉल मालिकों को ट्रैफिक पुलिस ने पार्किंग शुल्क नहीं वसूलने को कहा था। क्योंकि जीसीडीआर इसकी अनुमति नहीं देता है। इस पूरे मामले की शुरूआत यही से हुई थी।

लेकिन कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया है कि जीसीडीआर ने फ्री पार्किंग देना भी अनिवार्य नहीं किया है। इसलिए ट्रैफिक पुलिस को भी अपना आदेश वापस लेना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि पार्किंग शुल्क पर दिशानिर्देश भी तैयार किया जाना चाहिए।

लेकिन मॉल मालिकों ने इस फैसले को डीवीजन बेंच के पास ले गए। क्योंकि उनका मानना था कि पार्किंग शुल्क के लिए किसी भी प्रकार का कानून नहीं बनना चाहिए। इसे पूरी तरह से मॉल मालिकों के ऊपर ही रहने देना चाहिए की वो कितना शुल्क लेना चाहते है।

वही कोर्ट ने भी पूरे मामले की जांच के बाद यह स्पष्ट कर दिया है कि अनुच्छेद 226 के तहत किसी भी संस्था को पार्किंग शुल्क के वसूलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है। इसलिए जब तक पार्किंग शुल्क के लिए कोई कानून नहीं बन जाता कोई भी मॉल या मल्टीप्लेक्स मालिक पार्किंग शुल्क वसूल नहीं कर सकते है।


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