केंद्र सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति को दिखाई हरी झंडी, उत्पादकों को मिलेंगे कई लाभ
(Green Hydrogen Policy): केंद्र सरकार ने गुरुवार (17 फरवरी) को ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया नीति को अधिसूचित किया, जिसका उद्देश्य 2030 तक हरित हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन को 5 मिलियन टन तक बढ़ाना और भारत को स्वच्छ ईंधन के लिए निर्यात केंद्र बनाना है। ग्रीन हाइड्रोजन पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से उत्पादित हाइड्रोजन गैस है। इसे प्राप्त करने के लिए अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत होती है।

घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
इस नीति के तहत ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने वाले संयंत्रों को बिजली देने वाले ग्रीन एनर्जी प्लांट्स पर ऊर्जा ट्रांसमिशन पर लगने वाला टैक्स 25 साल तक नहीं लिया जाएगा। हालांकि, इसका फायदा केवल उन्हीं ग्रीन एनर्जी प्लांट्स को दिया जिनका संचालन 2025 के पहले शुरू किया जाएगा।

इसका मतलब यह है कि राजस्थान में स्थापित होने वाला एक सौर ऊर्जा संयंत्र, देश के किसी भी अन्य हिस्से में चल रहे ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट को मुफ्त में बिजली की सप्लाई करने में सक्षम होगा। इसके लिए सरकार सौर ऊर्जा तैयार करने वाली कंपनी पर इंटर-स्टेट एनर्जी ट्रांसमिशन टैक्स नहीं लगाएगी।

इस कदम से हाइड्रोजन और अमोनिया के प्रमुख उपयोगकर्ताओं जैसे तेल रिफाइनरी, उर्वरक और इस्पात क्षेत्रों के लिए अपने स्वयं के उपयोग के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना अधिक किफायती हो जाएगा। ये क्षेत्र वर्तमान में प्राकृतिक गैस या नेफ्था का उपयोग करके उत्पादित ग्रे हाइड्रोजन या ग्रे अमोनिया का उपयोग करते हैं।

सरकार ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए सिंगल पोर्टल के द्वारा मंजूरी दे रही है, साथ ही उत्पादकों को अपने सरप्लस उत्पादन को 30 दिनों तक संरक्षित रखने के लिए और आवश्यकतानुसार इसका उपयोग करने की अनुमति दे रही है। बिजली मंत्रालय ने यह भी कहा है कि ग्रीन हाइड्रोजन/अमोनिया के उत्पादन के लिए स्थापित ऊर्जा संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर ग्रिड से जोड़ा जाएगा।

भारत से होगा निर्यात
नीति के तहत बंदरगाह प्राधिकरण निर्यात से पहले भंडारण के लिए बंदरगाहों के पास बंकर स्थापित करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया उत्पादकों को लागू शुल्क पर भूमि प्रदान करेंगे। बिजली मंत्री आरके सिंह ने पहले उल्लेख किया है कि जर्मनी और जापान भारत में उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन के लिए प्रमुख बाजार हो सकते हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत इस्पात, रिफाइनरी, और उर्वरक कंपनियों के द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन की खरीद की मात्रा को भी तय किया गया है। बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा था कि ये क्षेत्र अपनी कुल आवश्यकता का 15-20 प्रतिशत ग्रीन हाइड्रोजन खरीद सकते हैं।


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