इलेक्ट्रिक वाहनों के बाद हाइब्रिड पर भी कम हो सकती है जीएसटी, सरकार कर रही विचार
भारत का परिवहन क्षेत्र में कई बदलाव आ रहे है। हाल कि दिनों में सरकार द्वारा लिए गए फैसले इसे और तेजी देते है। भारत सरकार की योजना 2025 तक देश में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के परिचालन की गति में तेजी लाना है।

इसके लिए सरकार ने कई बड़े कदम भी उठाएम है। सरकार लगातार ऑटो निर्माताओं से बातचीत कर उन्हें इकोफ्रेंडली ईंधन से चलने वाले वाहनों के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

इस बारे में सियाम कॉन्क्लेव में बोलते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की तरह, सरकार हाइब्रिड वाहनों पर भी जीएसटी को कम करने पर विचार कर रही है।

भारत सरकार ने पहले 2019 के बजट में ईवीएस पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% कर दिया था। वहीं एक 1 सितंबर से देशभर में संसोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू कर दिया गया है। इस जुलाई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% करने की घोषणा की थी।

नितीन गडकरी ने सभी को संबोधित करते हुए कहां कि सरकार पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% करने के लिए जीएसटी परिषद को स्थानांतरित कर चुकी है।

ईवीएस को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाने के लिए, सरकार ईवीएस खरीदने के लिए लिए गए ऋण पर दिए गए ब्याज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आयकर कटौती प्रदान करेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019-20 के लिए बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार ने 1 अप्रैल, 2019 को FAME II योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है।

इससे सही प्रोत्साहन प्रदान कर और बुनियादी ढांचा प्रदान करके इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया जा सकेगा। एफएम ने यह भी कहा कि वांछनीय क्षमता के राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड के निर्माण को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम का व्यापक पुनर्गठन होगा।

सरकार द्वारा हाइब्रिड वाहनों पर जीएसटी दर कम करने पर विचार
भारत सरकार पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दरों को कम कर चुकी है। इस फैसले का सभी तरफ से स्वागत किया गया है। अगर सरकार भविष्य में हाइब्रिड वाहनों को भी कम जीएसटी के दायरे में लाती है, तो यह आम ग्राहकों के लिए अच्छा फैसला होगा।

साथ ही इससे लोगों को पर्यावरण के अनुरूप चलने वाली वाहनों को खरीदना आसान हो जाएगा। क्योंकि देश में मौजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत बहुत ही अधिक है। यह हर किसी के पहुंच के भीतर नहीं है।

हालांकि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए ऋण भी दे रही है। लेकिन इसके बावजूद भारतीय ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर पूरी तरह से अश्वस्त नहीं है।


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