सरकारी एजेंसियों में बढ़ रहा है इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल, 5,384 इलेक्ट्रिक वाहन हैं रजिस्टर
भारत सरकार के साथ-साथ देश के विभिन्न राज की सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में दिए एक बयान में सरकारी एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल में लाए जा रहे इलेक्ट्रिक वाहनों के आंकड़ों का खुलासा किया है। गडकरी ने गुरुवार को संसद को सूचित किया कि 4 फरवरी 2022 तक केंद्र और राज्य सरकारों और स्वायत्त निकायों सहित सरकारी एजेंसियों द्वारा उपयोग किए जा रहे 8,47,544 वाहनों में से कुल 5,384 इलेक्ट्रिक वाहन हैं।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों द्वारा सबसे ज्यादा 1,352 इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरकारी उपक्रमों द्वारा 1,273 वाहन और राज्य सरकारों द्वारा 1,237 इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग किए जा रहे हैं।

एक अलग सवाल का जवाब देते हुए गडकरी ने कहा कि जनवरी, 2022 में स्वीकृत किये गए भारतमाला परियोजना चरण- I के तहत 34,800 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) के कुल लंबाई में से लगभग 19,363 किलोमीटर की परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है।

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के लिए 59,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बजटीय सहायता आवंटित की है। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2014 में लगभग 91,287 किमी से बढ़ाकर वर्तमान में लगभग 1,41,190 किमी हो गई है। एक अन्य सवाल के जवाब में गडकरी ने कहा कि शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में देश भर में 48,144 ई-चालान जारी किये गए हैं।

देश में 31 मार्च 2019 तक 63.71 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें, ग्रामीण सड़कें और शहरी सड़कें शामिल हैं। यह अमेरिका के 66.45 लाख किमी के सड़कों के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है।

बता दें कि देश में 2025 तक राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2 लाख किलोमीटर तक हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे यात्रा के समय और ईंधन लागत में कटौती के अलावा, आर्थिक विकास में भी मदद करते हैं। जानकारी के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता लॉजिस्टिक्स की लागत को जीडीपी के मौजूदा 14-16 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करना है। चीन में यह 8-10 फीसदी और यूरोपीय देशों में 12 फीसदी है। अगर इसे 10-12 फीसदी तक लाया जाता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत अच्छी प्रतिस्पर्धा कर सकता है।

बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने लॉकडाउन के दौरान भी राजमार्गों के निर्माण का काम जारी रखा था। मार्च 2020 से लॉकडाउन के वजह से ट्रैफिक नहीं होने के कारण कई परियोजनों में निर्माण की रफ्तार को बढ़ाने में भी सफलता मिली थी।

इस दौरान एजेंसी ने निर्माण में कुछ रिकॉर्ड उपलब्धियां भी हासिल कीं। पिछले साल, NHAI ने 25.54 किलोमीटर सिंगल लेन सड़क का विकास केवल 18 घंटों में पूरा कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह सड़क NH-52 पर विजयपुर और सोलापुर के बीच फोर-लेन हाईवे पर स्थित है।

एनएचएआई ने पिछले साल फरवरी में एक दिन के भीतर फोर-लेन हाईवे पर सबसे अधिक मात्रा में कंक्रीट डालने का एक और विश्व रिकॉर्ड बनाया था। यह उपलब्धि ठेकेदार पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने हासिल की और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया।


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