अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसे रखी भारत के आर्थिक विकास की नींव
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बंढिया ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बिना कोई भी देश आर्थिक तरक्की नहीं कर सकता। कहा जाता है की आर्थिक तरक्की के कारण अमेरिका की सड़कें नहीं बल्कि सड़कों की वजह से अमेरिका का आर्थिक विकास हुआ। चीन का भी लगभग यही हाल है, अमेरिका के बाद चीन में ही बड़ा रोड नेटवर्क है। इस बात को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बहुत पहले ही जान लिया था। देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज हाइवे प्रोजेक्ट और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की जिसने देश के कई बड़े शहरों को सड़कों से जोड़ दिया। इस इंफ्रास्ट्रक्चर ने देश की आर्थिक तरक्की में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है।

वर्ष 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के चार बड़े महानगरों - दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नै - को चार से छह लेन वाले राजमार्गों के नेटवर्क से जोड़ने की एक योजना बनाई। मैप पर देखे जाने पर यह राजमार्ग चतुर्भुज आकार का दिखता है और शायद इसी कारण इसे स्वर्णिम चतुर्भुज कहा गया।

वर्ष 1999 में योजना बनकर पूरी और वर्ष 2001 में आधिकारिक रूप से इसके निर्माण कार्य की शुरुआत की गई और वर्ष 2012 में जाकर यह परियोजना पूर्ण हुई। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत बने इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 5,846 कि.मी. है और इसके निर्माण में लगभग 6 खरब रुपए का खर्च आया। यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी परियोजना में शामिल है।

नेशनल हाइवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (NHDP) के साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PGMSY) के तहत भारत के ग्रामिण इलाकों में सड़कें बनी और इसने स्थानिय शहर और हाइवे को आपस में जोड़ दिया। ये योजना आज भी जोर-शोर से चलाई जा रही है। इसके अलावा भी अटल बिहारी वाजपेयी ने कई सेक्टर में बड़े-बड़े रिफॉर्म किये हमारी अर्थव्यवस्था को गती दी। जैसे दूरसंचार, नागरिक उड्डयन, बैंकिंग, बीमा, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, विदेशी व्यापार और निवेश, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, कृषि उत्पादन विपणन, लघु-उद्योग आरक्षण, राजमार्ग, ग्रामीण सड़कों, प्राथमिक शिक्षा, बंदरगाहों, बिजली जैसे क्षेत्र , पेट्रोलियम की कीमतें और ब्याज दरें सभी दूरगामी सुधारों के अधीन थीं और दुनिया में भारत के पावर ग्राफ को ऊंचा करती थीं।

इतने सुधारों के बाद भी उस समय की वाजपेयी सरकार के द्वारा कुछ ऐसे कदम भी उठाए गए जिसकी वजह से देश को आर्थिक नुकसान भी उठाने पड़े। जैसे की पोखरण में परमाणू परिक्षण। इसके कारण पश्चिमी देशों और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका द्वारा देश पर कई पाबंदियां लगा दी गई जिसका भारत को आर्थिक मोर्चे पर काफी नुकसान झेलना पड़ा। हालांकि इतनी रुकावटों को बाद भी वाजपेयी के पांच वर्षिय सरकार की जीडीपी ग्रोथ 8 प्रतिशत से ऊपर थी और महंगाई 4 प्रतिशत से कम। विदेशी मुद्रा भंड़ा भी लगातार बढ़ रहा था।

स्वर्णिम चतुर्भुज के चारों वर्ग
यहां स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का विशेष जिक्र करना आवश्यक है क्योंकि ये योजना अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा ही शुरू की गई थी, जो आगे चलकर काफी सफल रहा। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना को पुरा करने के लिए इसे चार भागों में बांटा गया था। भाग 1 में दिल्ली से कोलकाता को जोड़ता है, जिसकी कुल लंबाई 1454 किलोमीटर है। भाग 2 कोलकाता से चेन्नई तक विस्तृत है, जिसकी कुल लंबाई 1,684 किलोमीटर है। भाग 3 चेन्नई और मुंबई के बिच फैला है, जिसकी कुल लंबाई 1,290 किलोमीटर है और अंतिम और चौथा भाग मुंबई से दिल्ली के बिच फैला है और इसकी कुल लंबाई 1,419 किलोमीटर है।

स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्गों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख राज्य
स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग देश के लगभग 13 राज्यों के मध्य से होकर गुजरता है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश राज्यों से होकर जाता है।

स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्गों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख शहर
स्वर्णिम चतुर्भुज भारत के मुख्य शहरों के बीच परिवहन का एक बेहद ही महत्वपूर्ण रोल अदा करता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग ने देश के प्रमुख चार शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नै के अलावा भी कई प्रमुख बंदरगाहों और शहरों को जोड़ता है। जैसे भुवनेश्वर, जयपुर, कानपुर, पुणे, सूरत, गुंटुर, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, अहमदाबाद और बेंगलुरु इत्यादि।

बता दें कि भारत के पुर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार, 16 अगस्त 2018 को दिल्ली में निधन हो गया। शाम पांच बजकर पांच मिनट पर दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली है। उनके निधन से पुरे देश में शोक की लहर है और एक सप्ताह के लिए राजकीय शोक की घोषणा कर दी गई है। अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, लेकिन इसमें उनका तीसरा और अंतिम कार्यकाल ही पांच साल का था , शुरुआती दो में वो महज 13 दिन और 13 महिने के लिए ही प्रधानमंत्री बने थे। अपने इस कार्यकाल में उन्होंने देश को काफी कुछ दिया है।
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