फार्मूला 1 से जुडे इन बातों को जान दंग रह जायेंगे
फार्मला वन एक बेहद ही रोमांचकारी दुनिया का नाम है। जी हां, रेसिंग ट्रैक पर धुएं के गुबार के बीच, दिल को दहला देने वाली रफ्तार से आगे बढ़ते रफ्तार के जंगियों को देखते ही बनता है। पिछले वर्ष 2011 में भारत में भी इस इस अनोखे खेल की शुरूआत नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल ट्रैक पर हुई। करोड़ो रुपये के लागत से बने इस ट्रैक पर आयोजित इंडियन ग्रां प्री देखने लायक था।
एक बार फिर 2014 ग्रां प्री की शुरआत होने जा रही है, लेकिन फार्मूला वन के कॉमर्शियल प्रमुख बर्नी एक्लेस्टोन ने अचानक से इंडियन ग्रां प्री के ट्रैक पर भूचाल ला दिया है। एक्लेस्टोन ने इस दौरान कहा कि, अगले वर्ष भारत में होने वाली ग्रां प्री रेस पर संशय की स्थिती है। हालांकि अभी इस बारें में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है और ना ही यह अंतिम निर्णय है।
इस बारें में, फार्मूला वन रेसर करूण चंडोक का कहना है कि, एक्लेस्टोन ने जो बयान दिया है वो अंतिम निर्णय नहीं है, हमें उम्मीद है कि कि अगले वर्ष इंडियन ग्रां प्री का आयोजन किया जायेगा। इस रेस में दुनिया भर से आयीं 12 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं। जहां एक तरफ यह खेल बेहद ही रोमांचकारी है, वहीं इस खेल के पर्दे के पिछे की दुनिया भी काफी रोचक है। तो आइये तस्वीरों में देखते हैं, फार्मूला-1 से जुड़ी कुछ रोचक बातें।

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आगे नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें और जानें, फार्मूला 1 से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।

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कार का स्टीयरिंग बच्चों द्वारा खेले जाने वाले किसी विडीयों गेम के कन्ट्रोलर की तरह होता है।

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स्टीयरिंग में ही क्लच, स्पीडो मीटर, कार विंग कन्ट्रोलर, और रेडियो ट्रांसमीटर लगा होता है, जिसकी मदद से चालक कन्ट्रोल रूम से सीधे जुड़ा रहता है।

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एक सीजन में एक टीम कुल 2 लाख लीटर तेल खाती है, यानी करीब 1 करोड़ 52 लाख रुपए का पेट्रोल चार दिन में खर्च होता है। रेस के दौरान एफ1 कार महज 100 किलोमीटर के लिए ही 75 लीटर इंधन का खपत करती है।

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एफ1 कार रेसिंग के दौरान लगभग 18,000 आरपीएम पर चलती है। रेसिंग ट्रैक पर कारों की गति लगभग 350 किलोमीटर प्रतिघंटा की होती है।

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कार के भीतर ही रडार सिस्टम से चालक सीधे कन्ट्रोल रूम से जुड़ा होता है। किसी भी आपात स्थिती में उसे कन्ट्रोल रूम से जरूरी निर्देश मिलते रहते हैं। बगैर आदेश के चालक अपनी कार को ट्रैक पर रोक नहीं सकता है, इससे पीछे से आ रहे तेज रफ्तार कारों से टक्कर की संभावना बढ़ जाती है।

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350 किलोमीटर की रफ्तार के चलते कार का बाहरी आवरण बेहद गर्म हो जाता है जिसके कारण ड्राइवर को हमेशा पानी की आवयश्क्ता पड़ती है, इसके लिए चालक के हेल्मेट में ही पाइप लगा होता है, जिससे वो समयानुसार पानी पिता रहता है।

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बुद्व इंटरनेशनल सर्किट देश का पहला एफ1 रेस ट्रैक है, इसकी कुल लंबाई 5.14 किलोमीटर है। रेसिंग ट्रैक की लंबाई लगभग 308 किलोमीटर है। बुद्व इंटरनेशनल रेसिंग ट्रैक कुल 875 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है। इंडियन ग्रांड प्री रेसिंग ट्रैक का निर्माण जेपी ग्रूप ने करवाया है। इस रेसिंग ट्रैक के निमार्ण में कुल 2,000 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। इस रेस ट्रैक पर प्रतियोगिता के दौरान कुल 5,000 कर्मचारी काम पर होंगे, जिसमें से 300 बेहतरीन इंजीनियर होंगे। इस रेसिंग ट्रैक की उंचाई कुल 14 मीटर है।

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सन 1991 में आस्ट्रेलिया ग्रां प्री अभी तक की दुनिया की सबसे छोटी फार्मूला वन रेस है। भारी बरसात के कारण यह रेस प्रभावित हुई थी, जिसमें 16वें लैप के बाद रेस रोक दी गई थी और 81 लैप में ही रेस पूरी कर ली गई।

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भारतीय टीम का नाम सहारा फोर्स इंडिया है। सहारा फोर्स इंडिया टीम के चालक आड्रियन सुटील, और पॉल डी रेस्टा हैं।

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इस रेस में प्रथम स्थान पर आने वाले को 25 अंक, दूसरे स्थान पर 18 अंक, तीसरे स्थान पर 15 अंक, और दंसवे स्थान पर आने वाले को 1 अंक दिया जाता है। इसी के आधार पर विजेता का चयन किया जाता है।

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एफ1 ग्रूप के सीईओ बर्नी एकेल्स्टन हैं। इन्होनें आगमी 2014 में इंडियन ग्रां प्री पर सवाल उठायें हैं।


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