दिल्ली-मेरठ RRTS की पहली ट्रेनसेट पहुंची दुहाई डिपो, जल्द ही शुरू होगा संचालन, जानें क्या है खास
देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) की ट्रेन दुहाई डिपो पहुंच गई है। दिल्ली-मेरठ RRTS ट्रेनसेट को गुजरात के सावली स्थित मैन्यूफेक्चरिंग प्लांट से ट्रेलर पर लोड किया गया था और इसे सड़क मार्ग से दुहाई लाया गया है। RRTS ट्रेन, दुहाई डिपो तक पहुंचने की अपनी यात्रा में, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों के माध्यम से यात्रा कर चुकी है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) की माने तो दिल्ली-मेरठ RRTS ट्रेन के सभी छह डिब्बों को छह अलग-अलग ट्रेलरों पर लोड किया गया था। दुहाई डिपो पहुंचने पर कोचों को क्रेन की मदद से उतार दिया गया था। बता दें कि आने वाले दिनों में RRTS ट्रेनसेट दुहाई डिपो में ही असेंबल की जाएगी।

NCRTC ने आगे कहा कि दुहाई डिपो में ट्रेन के आने के लिए ट्रैक पहले ही पूरा कर लिया गया था और अब इसके परीक्षण की तैयारी चल रही है। इसके अलावा NCRTC ने बताया कि RRTS ट्रेनों के संचालन के लिए दुहाई डिपो में ही प्रशासनिक भवन की स्थापना की गई है।

सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत, Alstom कंपनी को RRTS ट्रेनों के निर्माण का ठेका दिया गया था, जिसके अनुसार, वे मेरठ मेट्रो के लिए 10 थ्री-कार ट्रेनसेट सहित 40 RRTS ट्रेनसेट वितरित करेंगे, जो 15 सालों के लिए रोलिंग स्टॉक रखरखाव के साथ बंडल किए जाएंगे।

NCRTC से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर से कार्बन-डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन में प्रति वर्ष लगभग 2,50,000 टन की कमी आने की संभावना है। कॉर्पोरेशन का दावा है कि RRTS परियोजना सबसे अधिक ऊर्जा कुशल फ्यूचरिस्टिक ट्रांजिट सिस्टम साबित होगी।

यह परियोजना मूल रूप से जुड़े मेगा-क्षेत्रों के लिए एक नए युग की शुरुआत करने के साथ-साथ भविष्य में इसी तरह की परियोजनाओं के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करेगी। इस आरआरटीएस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए एनसीआरटीसी प्रयासरत है।

NCRTC अगले वर्ष तक प्राथमिकता खंड पर संचालन शुरू करने और साल 2025 तक पूरे कॉरिडोर को चालू करने की योजना बना रहा है। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद यात्रियों को दिल्ली से मेरठ शहर की दूरी तय करने में सिर्फ 55 मिनट का ही समय लगेगा।


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