फास्टैग ने अब पकड़वाए कार चोर, सिर्फ पांच घंटे के भीतर मिली वापस

भारत में ऐसे लोग जो आवाजाही के लिए हाईवे का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं वे फास्टैग खरीदने और उन्हें वाहनों में चिपकाने में व्यस्त हैं। फास्टैग की अत्यधिक मांग और लोगों में इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्टैग को लागू करने की सिमा 15 जनवरी 2020 तक बढ़ा दी है।

फास्टैग ने अब पकड़वाए कार चोर, सिर्फ पांच घंटे के भीतर मिली वापस

फास्टैग एक रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग है जिसे गाड़ियों के विंडशील्ड पर लगाया जाता है। जब वाहन टोल प्लाजा से गुजरते हैं तो फास्टैग से जुड़े प्रीपेड अकाउंट से स्वतः ही टोल राशि काट ली जाती है।

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इस व्यवस्था से टोल प्लाजा पर नगद लेन-देन पर रोक लगेगी, जिससे टैक्स चोरी पर भी लगाम लगेगी। फास्टैग केवल टोल पेमेंट की लिए ही नहीं है बल्कि, इससे आपके वाहन से जुड़ी सभी जानकारी दर्ज हो जाती है, जिससे किसी वाहन को ट्रैक करने या उसकी जानकारी इकठ्ठा करने में भी मदद मिलती है।

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पुणे के कार्वेनगर के बिल्डर राजेंद्र जगतप को उसकी चोरी चली गई महिंद्रा स्काॅर्पियो फास्टैग की मदद से वापस मिल गई। दरअसल, 23 दिसंबर को राजेंद्र अपनी नई स्कॉर्पिओ को घर के बहार पार्क कर सो रहे थे, तभी उनके मोबाइल फोन पर फास्टैग टोल कटने का मैसेज आया।

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पहला टोल सुबह 4.38 मिनट में तलेगांव में कटा था जबकि दूसरा टोल सुबह 5.50 मिनट में पनवेल (पुणे-मुंबई हाईवे) में कटा था। मैसेज देख कर राजेंद्र के होश उड़ गए और वह दौड़ते हुए घर के बहार कार को देखने के लिए निकले, तब उन्हें मालूम चला की उनकी कार किसी ने चोरी कर ली है।

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बिना देर किए राजेंद्र ने नजदीकी पुलिस स्टेशन को घटना के बारे में सूचित किया। पुलिस ने वाहन के फास्टैग की रीडिंग और जीपीएस के जरिये जानकारी इकठ्ठा करना शुरू कर दिया। जांच में पता चला की गाड़ी ठाणे के आस पास है।

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इस मामले की जानकारी ठाणे पुलिस चौकी को दी गई जिसके बाद ठाणे पुलिस एक्शन में आ गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की, जिसमे कार को सुबह 8 बजे घोड़बंदर रोड के पास से खोज निकला गया। हालांकि, चोर पुलिस के आने से पहले ही फरार हो गए थे।

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पुलिस ने राजेंद्र को उनकी महिंद्रा स्कॉर्पिओ सही सलामत वापस सौंप दी। इस घटना से पता चलता है कि फास्टैग का उपयोग न सिर्फ टोल जमा करने बल्कि चोरी की गई गाड़ी का भी पता लगाने में किया जा सकता है।

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जब फास्टैग लगी गाड़ी टोल प्लाजा से गुजरती है तब गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, मालिक का विवरण, पता व टोल टाइम जैसी कई जानकारी फास्टैग के सर्वर में दर्ज हो जाती है, जिसका इस्तेमाल करके वाहन की स्थिति पता की जा सकती है।

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ड्राइवस्पार्क के विचार

सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर फास्टैग वाली गाड़ियों के लिए विशेष लेन बनाए गए हैं। एक रिसर्च के अनुसार 100 प्रतिशत फास्टैग टोल भुगतान से हर साल 12 हजार करोड़ रुपये का ईंधन और कार्य क्षमता की बचत होगी। टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगा जिससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।

Article Published On: Thursday, December 26, 2019, 12:55 [IST]
English summary
Fastag helps to trace stolen Mahindra Scorpio. Read in Hindi.
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