Exide इडस्ट्रीज जल्द शुरू करेगी लिथियम आयन बैटरी का उत्पादन, लगाएगी गीगा फैक्ट्री
बैटरी निर्माता एक्साइड इंडस्ट्रीज बहुत जल्द लिथियम आयन बैटरी की बिक्री शुरू कर सकती है। कंपनी ने हाल ही में लिथियम-आयन (ली-आयन) सेल निर्माण में उतरने की घोषणा की और कहा कि वह इसके लिए भारत में एक गीगावाट संयंत्र स्थापित करेगी। एक्साइड इंडस्ट्रीज लिथियम आयन बैटरी के उत्पादन के लिए भारत सरकार सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम से भी जुड़ सकती है।

एक्साइड ने अपनी सहायक कंपनी एक्साइड लेक्लेंच एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (ब्रांड नेक्सचार्ज के तहत) के माध्यम से संयुक्त उद्यम पार्टनर लेक्लेंच एसए, स्विटजरलैंड के साथ लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम और ऊर्जा समाधान में भी प्रवेश किया है।

अपने अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास केंद्र के साथ, सहायक कंपनी का उद्देश्य लिथियम-आयन बैटरी बनाना और भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार और ग्रिड-आधारित अनुप्रयोगों के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली प्रदान करना है।

एक्साइड दुनिया की कुछ बड़ी लीड एसिड स्टोरेज बैटरी निर्माताओं में से एक है। कंपनी लीड एसिड बैटरियों की विस्तृत श्रृंखला का डिजाइन, निर्माण, विपणन और बिक्री करती है। बैटरियों का निर्माण मोटर वाहन, बिजली, दूरसंचार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, कंप्यूटर उद्योगों के साथ-साथ रेलवे, खनन और रक्षा क्षेत्रों के लिए किया जाता है। कंपनी का ग्राहक नेटवर्क भारत समेत छह महाद्वीपों के कुल 60 देशों में फैला हुआ है।

एक्साइड इंडस्ट्रीज के एमडी और सीईओ, सुबीर चक्रवर्ती ने कहा, "हमने अब एक बहु-गीगावाट लिथियम-आयन सेल निर्माण संयंत्र स्थापित करने और भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित उन्नत रसायन सेल निर्माण के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना में भाग लेने की योजना बनाई है। सेल निर्माण लिथियम-आयन बैटरी निर्माण श्रृंखला का एक अभिन्न अंग है, और हमें विश्वास है कि इस संयंत्र की स्थापना हमें अधिक लागत-प्रतिस्पर्धी होने और अपने सम्मानित ग्राहकों की बेहतर सेवा करने में सक्षम बनाएगी।"

क्या है PLI स्कीम
घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और आयात में कटौती करने के लिए केंद्र सरकार ने पीएलआई योजना (PLI Scheme) को शुरू किया है। इसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पाद पर कंपनियों को प्रोत्साहन देना है। इसके लिए केंद्रीय बजट 2020-21 में सरकार ने 13 उद्योग क्षेत्रों के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये की पीएलआई योजना की घोषणा की थी। इसमें ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए 26,000 करोड़ रुपये रुपये की पीएलआई योजना को मंजूरी दी गई है।

इस योजना के तहत ऑटो उद्योग में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक पॉवर स्टीयरिंग सिस्टम, सेंसर, सुपर कैपिसिटर, सनरूफ, अडाप्टिव फ्रंट लाइटिंग, ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और काॅलिजन वार्निंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियों को फायदा पहुंच सकता है।

ऑटो उद्योग को विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर कंपोनेंट के लिए चीनी आयात निर्भरता को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पूरी तरह घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं है। भारत में बनाने वाली गाड़ियों के कई उपकरण चीन से मंगाए जाते हैं। ऐसे में भारत को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए चीन पर निर्भरता कम करनी होगी।

केंद्रीय एडवाइजरी नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि अगले दो साल के दौरान बैटरियों के दाम नीचे आएंगे जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत कम होगी। इसके लिए जरूरी है कि हम आयत पर निर्भरता को कम करते हुए देश में इनोवेशन, एफिशिएंसी और निवेश को प्रोत्साहनदेने के उपाय करें।


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