डच छात्रों ने बेकार कचरे से बनाई यह बेहतरीन इलेक्ट्रिक कार, देती है 220 किमी की रेंज
इलेक्ट्रिक कारों का बाजार पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर कार निर्माता कंपनियां नई तकनीक और फीचर्स से लोडेड इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में उतारने के लिए लगातार शोध कर रही है, वहीं कुछ स्वतंत्र तकनीशियन भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर काम करते ही रहते हैं।

हम आपको भारत के कुछ ऐसे ही उदाहरण दिखा चुके हैं, जिसमें स्वतंत्र रूप से काम करने वाले इंजीनियर्स ने अपनी कुशलता और इंजीनियरिंग के बल पर पेट्रोल या डीजल से चलते वाले वाहनों को ऑल-इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील किया है।

अब एक ऐसा ही कुछ डच छात्रों की एक टीम ने भी किया है। इन छात्रों ने पूरी तरह से कचरे से बनी एक इलेक्ट्रिक कार बनाई है। यह कार पूरी तरह से काम करती है। जानकारी के अनुसार इस कार को समुद्र से निकले प्लास्टिक, रीसाइकल्ड पीईटी बोतलें और घरेलू कचरे से बनाया गया है।

आइंडहोवन के तकनीकी विश्वविद्यालय ने इस कार के बारे में जानकारी दी है। विश्वविद्यालय का कहना है कि "इस कार को चमकदार पीले कलर में रखा गया है और इसका नाम लुका रखा गया है। यह स्पोर्टी टू-सीटर इलेक्ट्रिक कार है, जिसे छात्रों ने बनाया है।

विश्वविद्यालय ने आगे कहा कि "यह कार एक बार पूरी तरह से चार्ज होने पर अधिकतम 220 किलोमीटर तक की रेंज प्रदान करती है और इस कार की अधिकतम रफ्तार 56 मील प्रति घंटा यानी करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटे आंकी गई है।"
इस प्रोजेक्ट की मैनेजर लिसा वैन एटन ने मीडिया को जानकारी दी है कि "यह कार वास्तव में स्पेशल कार है, क्योंकि यह कार बिल्कुल बेकार चीजों से बनाई गई है। इस कार की चेसिस फ्लैक्स और रीसाइकल्ड पीईटी बोतलों से बनाई गई है।"

आगे उन्होंने बताया कि "कार के इंटीरियर को बनाने के लिए हमने अनसॉर्टेड घरेलू कचरे का भी इस्तेमाल किया है। इस कार को लगभग 18 महीनों में 22 छात्रों के समूह द्वारा डिजाइन और बनाया गया था, जो कचरे की क्षमता को साबित करने का प्रयास है।"


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