Night Driving के दौरान दुर्घटना से बचने के लिए Low Beam हेडलाइट का करें इस्तेमाल, जानें क्या है नियम
रात में कार ड्राइव करते वक्त कई तरह की दिक्कतें आती हैं। इनमें हेडलाइट्स का सही प्रयोग भी शामिल है। हेडलाइट्स का सही प्रयोग नहीं करने पर बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
इस आर्टिकल में जानिए रात में कार ड्राइव करते समय कब आपको अपनी कार की हेडलाइट को High Beam और Low Beam पर रखना चाहिए? जिससे कार और आप दोनों ही सुरक्षित रह सकें।

जब हम रात में ड्राइविंग करते हैं तो कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हाइवे पर सामने से आ रही कार या ट्रक की लाइट से अक्सर परेशानी होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है हेडलाइट का High beam पर होना।
ऐसे में कई बार हम दुर्घटना का शिकार हो जाते है। इसको ध्यान में रखते हुए सड़क परिवहन मंत्रालय ने कुछ नियम बनाए है, जिन्हें रात में ड्राइविंग के दौरान जरूर फॉलो करना चाहिए।

अगर हम नेशनल हाईवे या एक्सप्रेस वे पर रात में सफर कर रहे होते हैं तब कार में हाई बीम लाइट का यूज करना चाहिए। क्योंकि हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर सामने से आने वाला वाहन डिवाइडर के दूसरी ओर चल रहा होते हैं।
जिसकी वजह से दूसरी कार की हाई बीम लाइट से आपको ड्राइविंग के दौरान परेशानी नहीं करती है। इससे हादसों की संभावना कम होती है।
वहीं जब हम सिंगल रोड या भीड़भाड़ वाली जगह पर ड्राइविंग कर रहे हैं तो Low Beam का यूज करना चाहिए। जिससे सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों पर तेज रोशनी का असर नहीं होता और उसे संभलने का पूरा मौका मिलता है। इससे दुर्घटना का शिकार होने से बच सकते हैं।
मोटर व्हीकल रेगुलेशन 2017 के अनुसार हाई बीम लाइट्स का इस्तेमाल कानूनी रुप से गलत है। नियम के अनुसार High Beam लाइट्स का इस्तेमाल कुछ सीमित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। इन लाइट्स को लगातार जलाए रखने से हादसा हो सकता है और आपका चालान भी कट सकता है।
High beam लाइट्स आपकी विजिबिलिटी को बढ़ा देती हैं, लेकिन सामने आ रहे ड्राइवर की आंखों को चकाचौंध कर देती है। ऐसा कई बार आपने भी महसूस किया होगा।
वहीं सड़क सुरक्षा के लिए फॉगलाइट का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है। फॉगलाइट का इस्तेमाल सिर्फ विशेष स्थितियों में ही करना चाहिए जैसे कि धुंध, कोहरे या खराब मौसम की स्थिति में। इससे से हमारी विजिबिलिटी बढ़ती है और हम सुरक्षित रहते हैं।


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