ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के पेपर डिजिटल फॉर्मेट में भी होंगे वैध, परिवहन मंत्रालय ने आदेश किया जारी
अब से आपको ड्राइविंग लाइसेंस तथा वाहन के डॉक्यूमेंट साथ में लेकर चलने की आवश्यकता नहीं है। हाल ही में परिवहन मंत्रालय ने इन्हें डिजिटल रूप में भी वैध माने जाने का आदेश सभी राज्यों को जारी कार लिया है।

ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के डॉक्यूमेंट को अब ऑनलाइन स्टोर करके रखा जा सकता है तथा चेकिंग या जरुरत के दौरान इसे ट्रैफिक पुलिस को दिखाया जा सकता है। लेकिन इसमें भी एक बात याद रखनी जरुरी है।

वह यह है कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के डॉक्यूमेंट को सिर्फ एमपरिवहन या डिजिलॉकर ऍप्लिकेशन में स्टोर किये जाने पर ही वैध माना जाएगा। अगर इसे आपने किसी अन्य ऍप्लिकेशन या किसी और तरह से डिजिटल रूप में रखा है तो इसे वैध नहीं माना जाएगा।

हॉल ही में परिवहन मंत्रालय द्वारा आदेश जारी करते हुए कहा गया है कि पिछले कुछ समय से मंत्रालय को यह शिकायत मिली है कि राज्यों द्वारा एमपरिवहन या डिजिलॉकर एप्प में मौजूद वाहन के डॉक्यूमेंट को वैध नहीं माना जा रहा है।

हाल ही में कई जगहों से ऐसी खबरें आयी थी कि देश में कई जगहों पर वाहन के डॉक्यूमेंट का प्रिंटेड रूप ना होने की वजह से लोगों को जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है। नोएडा में इसी के चलते एक बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु हो गयी थी।

इसके बाद उत्तरप्रदेश पुलिस ने बिना डॉक्यूमेंट की चेकिंग के लिए लोगों को रुकवाने से मना कर दिया था। परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि डिजिलॉकर व एमपरिवहन में उपलब्ध डॉक्यूमेंट को पूरी तरह से वैध माना जाएगा।

इसके साथ ही मंत्रलाय ने आगे कहा है कि सिर्फ फिजिकल कॉपी (प्रिंटेड रूप) ना होने की वजह से लोगो को बिना वजह परेशान करना तथा किसी भी तरह का जुर्माना लगाना सही बात नहीं है।

बतातें चले कि एमपरिवहन में वाहन के डॉक्यूमेंट होने पर भी आपको हमेशा इंटरनेट से कनेक्ट रहने की जरूरत नहीं है, एमपरिवहन में क्यूआर कोड का भी विकल्प दिया गया है। जो कि सामान्य एंड्राइड फोन पर भी स्कैन किया जा सकता है।

इस सुविधा से ट्रैफिक पुलिस व आम नागरिकों दोनों को लाभ मिलेगा। ट्रैफिक पुलिस को भी किसी तरह के रिकॉर्ड रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी, सभी जानकारी एप्लिकेशन पर ही उपलब्ध होगी। वहीं लोगों को डॉक्यूमेंट हर जगह लेकर घूमने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

ड्राइवस्पार्क के विचार
ड्राइविंग लाइसेंस तथा वाहन के डॉक्यूमेंट को डिजिटल रूप में वैध मानने के लिए केंद्र सरकार राज्यों सरकारों को पहले भी आदेश जारी कर चुकी है। लेकिन कई जगहों पर इसका पालन नहीं किया जाने की भारी शिकायत आ रही थी, इसलिए फिर से आदेश जारी किया गया है।


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