दिल्ली में बंद हुआ ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट, कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने उठाया कदम
दिल्ली सरकार ने कोविड -19 मामलों में वृद्धि को देखते हुए 6 जनवरी से राष्ट्रीय राजधानी में ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षणों को निलंबित कर दिया है। 6 जनवरी, 2022 से दिल्ली के सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में नए और मौजूदा ड्राइविंग लाइसेंस और यहां तक कि लर्निंग लाइसेंस परीक्षणों के लिए सभी नियुक्तियों को निलंबित कर दिया गया है। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने ट्विटर पर इस बात की जानकारी दी।

उन्होंने ट्वीट में लिखा कि बढ़ते कोरोना मामलों और हाल के डीडीएमए दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए, सभी आरटीओ में डीएल और एलएल परीक्षणों (ताजा और मौजूदा) के लिए सभी नियुक्तियों को 6 जनवरी 2022 से निलंबित किया जा रहा है। पुनर्निर्धारित तिथियों का विवरण सभी आवेदकों को एसएमएस द्वारा भेजा जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण वाहन चालकों को परेशानी न हो इसलिए दिल्ली सरकार लर्निंग लाइसेंस की वैद्यता को भी बढ़ाएगी। बता दें कि दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 10,665 ताजा मामले सामने आ चुके हैं। राष्ट्रीय राजधानी में पहले से ही 23,307 सक्रिय मामले हैं और ये एहतियाती उपाय निश्चित रूप से जनता को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे।

पुराने वाहनों पर लगा प्रतिबंध
बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग ने एक लाख से अधिक पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। राज्य में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को अनुमति नहीं देने के दिल्ली सरकार के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया है। डीजल वाहनों के अलावा 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का भी पंजीकरण रद्द किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 2016 में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। हाल ही में दिल्ली सरकार ने अपने फैसले को दोहराते हुए राज्य में इन वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की सूचना जारी की थी। दिल्ली सरकार ने डीजल वाहनों की पंजीकरण अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष करने के लिए परिवहन कानून में संशोधन किया था।

दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन अपनी क्षमता के एक तिहाई पर चल रहा है, वहीं सरकार ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिक बसों को चलाने पर भी जोर दे रही है। जैसे-जैसे वाहनों का जीवन बढ़ता है, वे प्रदूषण पैदा करना शुरू कर देते हैं।

दिल्ली में पहले 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को एनओसी नहीं दिया जा रहा था लेकिन अब सरकार उन्हें दिल्ली के बहार चलाने के लिए एनओसी दे रही है।

बता दें कि दिल्ली में समय सीमा पार कर चुके वाहन ऐसे राज्यों में चलाए जा सकते हैं जहां वाहनों को चलाने के लिए समय सीमा निर्धारित नहीं है। इसके लिए दिल्ली परिवहन विभाग उन्हें अन्य राज्यों में पंजीकृत करने के लिए एनओसी दे रहा है। दिल्ली सरकार पेट्रोल-डीजल पर चलने वाले पुराने वाहनों में इलेक्ट्रिक किट लगवाने की भी मंजूरी दे रही है।

पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक किट के रेट्रोफिटमेंट की अनुमति से राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक और शून्य-उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। दिल्ली परिवहन विभाग उन निर्माताओं को सूचीबद्ध कर रहा है जो पारंपरिक आईसीई (ICE) वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने के लिए इलेक्ट्रिक किट बनाते हैं।

दिल्ली-राज्यक्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। इसमें डीजल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की अहम भूमिका है। डीजल वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद वाहन मालिक दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी और छूट का लाभ उठा सकते हैं।


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