60 के दशक में इस Double-Decker Bus ने की थी लंदन से कलकत्ता तक की यात्रा, देखें तस्वीरें
कई रिपोर्ट्स का दावा है कि 60 के दशक में 'Albert' नामक एक Double-Decker Bus ने भारत और ब्रिटेन के बीच 15 यात्राएं की थीं और लंदन और सिडनी के बीच लगभग चार यात्राएं की थीं। लंदन के विक्टोरिया कोच स्टेशन पर यात्रियों की एक तस्वीर इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रही है।

इस तस्वीर में दुनिया के सबसे लंबे कोच रूट पर पहली बार सफर करने वाले यात्रियों को देखा जा सकता है, जो कि लंदन और कोलकाता के बीच सफर कर रहे थे। कोलकाता और लंदन के बीच सिंगल किराया 85 पाउंड यानी 7,889 रुपये था, जो कि बस सेवा शुरू होने के वर्ष को देखते हुए काफी महंगा है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 21 साल की सर्विस और एक दुर्घटना के बाद इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए अनुपयुक्त करार दे दिया गया था। इसके बाद इस बस को मई 1968 में एंडी स्टीवर्ट नाम के एक ब्रिटिश यात्री ने खरीद लिया, जो लंदन के लिए अपना रास्ता बनाना चाह रहे थे।

स्टीवर्ट ने इस बस को एक मोबाइल घर में बदल दिया और उसी वर्ष अक्टूबर में भारत के रास्ते सिडनी से लंदन तक 16,000 किलोमीटर की यात्रा 13 अन्य लोगों के साथ शुरू की थी। High Road For Oz का दावा है कि अल्बर्ट की पहली यात्रा मंगलवार, 8 अक्टूबर, 1968 को सिडनी के मार्टिन प्लेस में जीपीओ (सामान्य डाकघर) से शुरू हुई थी।

जिसके बाद वह 132 दिनों के बाद सोमवार, 17 फरवरी, 1969 को लंदन पहुंचे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लंदन, कोलकाता और सिडनी के बीच एक रेगुलर सर्विस के लिए साल भर की समय सारिणी तैयार की गई थी, जिसे अल्बर्ट टूर्स कहा जाता था।

High Road For Oz के अनुसार 4, 5, 6, 7, 8 और 9 नंबर की सभी ट्रिप सिडनी से होकर जाती हैं। ट्रिप संख्या 12, 13, 14 और 15 लंदन और कोलकाता के बीच संचालित हुई। भारत आगमन पर बस ने दिल्ली, आगरा, बनारस और कोलकाता में स्टॉप बनाया था।

ऊपर दिखाए गए कार्यक्रम के अनुसार 25 जुलाई, 1972 को लंदन से प्रस्थान किए यात्री 11 सितंबर, 1972 तक कोलकाता में पहुंचे थे। उस समय इस यात्रा में 49 दिनों का समय लगा था, जिसके चलते इतने लंबे समय ने इसे और भी ज्यादा मजेदार सफर बना दिया था।
खास बात यह है कि बस में कुछ अतिरिक्त 'लक्जरी सेवाएं' भी थीं, जैसे निचले डेक पर एक रीडिंग और डाइनिंग रूम, अलग-अलग स्लीपिंग बंक, यात्रियों को गर्म रखने के लिए पंखे के हीटर लगा था। लंबी यात्रा के दौरान यह बस को घर से कम कुछ महसूस नहीं होती थी।
Image Courtesy: Dr Rohit K Dasgupta/Twitter


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