कपिल शर्मा से धोखाधड़ी करना कार डिजाइनर को पड़ा महंगा, जानें क्या है मामला
कॉमेडियन कपिल शर्मा से ठगी के मामले में कार डिजाइनर दिलीप छाबड़िया को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एक एफआईआर में कपिल शर्मा ने दिलीप छाबड़िया पर 5.70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। बता दें कि कपिल शर्मा ने दिलीप छाबड़िया को 2017 में एक वैनिटी वैन डिजाइन करने के लिए 5.70 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन अभी तक कपिल शर्मा को वैन डिलीवर नहीं की गई है।

कपिल के अनुसार 2017 में छाबड़िया को पैसे दिए जाने के बाद वह वैनिटी वैन की डिलीवरी करने में टाल मटोल कर रहे हैं। कपिल ने 2018 तक वैन के पूरे पैसे दे दिए थे, जिसके बाद छाबड़िया ने उनसे जीएसटी के तौर पर 40 लाख रुपये की मांग की। कपिल ने जुलाई 2018 में उन्हें जीएसटी का भी भुगतान कर दिया।

हालांकि, इसके बाद भी कपिल को वैन की डिलीवरी नहीं की गई। इसकी शिकायत करने पर छाबड़िया ने उनसे फिर 60 लाख रुपये की मांग की, जिसके बाद कपिल ने उनपर कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया।

कपिल 2019 में छाबड़िया के खिलाफ अपनी शिकायत लेकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के पास गए। ट्रिब्यूनल ने छाबड़िया पर कार्रवाई करते हुए उनके बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया, लेकिन छाबड़िया यहीं नहीं रुके। उन्होंने कुछ महीनों बाद कपिल को वैनिटी वैन के स्पेयर पार्ट्स और उसके पार्किंग चार्ज के तौर पर 12 लाख रुपये की मांग कर दी।

इसके बाद कपिल शर्मा ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में छाबड़िया के खिलाफ एक केस दर्ज करवाया इसी मामले पर अभी मुंबई की क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट कार्रवाई कर रही है।

बता दें कि मार्च 2018 में कपिल शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर डीसी द्वारा डिजाइन की गई वैनिटी वैन की तस्वीरें साझा की थीं और इसके लिए दिलीप छाबड़िया का शुक्रियादा भी किया था। हालांकि, कपिल नहीं जानते थे कि जिस वैनिटी वन के लिए वो इतनी मोटी रकम चुका रहे हैं, वो उन्हें कभी नहीं मिलेगी।

दिलीप छाबड़िया को जालसाजी और धोखाधड़ी के एक मामले में 28 दिसंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने डिजाइनर पर आरोप लगाया है कि वह डीसी अवंति स्पोर्ट्स कार के फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल करके NBFC बैंकों से लोन लेने का रैकेट चला रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि पिछले चार वर्षों में लगभग 120 डीसी अवंती कारें बेची गईं, जिनमें से लगभग 90 कारें एक ही इंजन और चेसिस नंबर के साथ विभिन्न राज्यों में बैंक लोन के लिए पंजीकृत की गई थीं। इन कारों पर लिए गए लोन को बाद में बैंकों द्वारा एनपीए घोषित कर दिया गया था। छाबड़िया फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।


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