Milestone Colour Facts: आखिर मील के पत्थर अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं? जान लीजिए ये रहस्य
सड़क किनारे लगा मील का पत्थर तो आपने देखा ही होगा जिस पर किसी विशिष्ट स्थान की दूरी व उसका नाम लिखा होता है। सड़क पर ट्रैवल करते हुए आपको अलग-अलग रंग के माइलस्टोन (मील का पत्थर) किनारे लगे हुए दिखाई दिए होंगे। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि सड़क के किनारे नारंगी, पीला, काला, नीला और हरी पट्टी वाले माइलस्टोन क्यों लगाए जाते हैं? आइये जानते हैं इसकी क्या वजह है -

आपको बता दें कि भारत में कुल 58.90 लाख किलोमीटर सड़क का नेटवर्क हैं। जिसमें ग्रामीण सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और एक्सप्रेस वे शामिल हैं। इन सभी सड़कों पर सरकार जानकारी रखने के लिए अलग-अलग रंग के माइलस्टोन लगाती है। जिससे लोगों को यात्रा के दौरान पता रहे कि, आखिर वह ग्राीमड़ सड़क पर चल रहे है या एक्सप्रेसवे पर। आइए जानते हैं हर माइलस्टोन का रंग क्या कहता है...

नारंगी रंग का माइलस्टोन
अगर आपको सड़क के किनारे नारंगी रंग (ऑरेंज) का माइलस्टोन दिखे तो समझ लीजिए कि आप गांव में हैं या ग्रामीण सड़क पर चल रहे हैं। बता दें देश में 3 लाख 93 हजार ग्रामीण सड़क का नेटवर्क हैं जिनसे देश के सभी ग्राम शहरों से जुड़ते हैं।

पीले रंग का माइलस्टोन
इस रंग के माइलस्टोन नेशनल हाईवे पर लगाए जाते हैं। अगर आपको सड़क के किनारे पीली पट्टी वाले माइलस्टोन मिले तो आप समझ लीजिये कि आप नेशनल हाईवे पर चल रहे है। बता दें 2020 तक देश में कुल 1,51,019 किमी के नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा चुका है।

काले और नीले माइलस्टोन
सड़क के किनारे काला या नीला माइलस्टोन दिखने का मतलब है कि आप किसी बड़े शहर या जिले में आ गए हैं। आपको बता दें देश में 5 लाख 61 हजार 940 किमी शहरी सड़क नेटवर्क है।

हरे रंग का माइलस्टोन
इस तरह के माइलस्टोन राज्य सरकार के द्वारा बनाए गए हाईवे या राज्य हाईवे पर लगाए जाते हैं। इस तरह के हाईवे एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ते हैं। आपको बता दें कि ब्रिटिश काल में नागपुर में शून्य मील केंद्र (Zero mile centre) स्थापित किया गया था। यहां से सभी बड़े शहरों की दूरी की गणना की जाती है।


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