राहत की खबर! दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल मिलना शुरू, सरकार ने हटाया प्रतिबंध
Delhi Vehicle Policy: दिल्ली सरकार ने अपनी "एंड-ऑफ-लाइफ" (EOL) वाहन नीति को लागू करने के दो दिन बाद ही स्थगित कर दिया है। EOL व्हीकल्स को फ्यूल न दिए जाने वाली पॉलिसी 1 जुलाई, 2025 से लागू हुई थी, जिसका उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 15 वर्ष से पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहनों की आवाजाही को रोकना था। अब इस प्रतिबंध को हटा दिया गया है।
बैकफुट पर आई सरकार!
EOL व्हीकल्स को फ्यूल न दिए जाने का नियम आते ही आम लोगों ने अपनी समस्याएं सुनानी शुरू कर दीं। इसके अलावा, कई जगहों पर तकनीकी खामियों को भी देखा गया। नया नियम आते ही जनता द्वारा हो रही आलोचना और टेक्निकल ग्लिच के चलते दिल्ली सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को घोषणा की है कि इस नीति के तहत अब वाहनों को जब्त नहीं किया जाएगा।

क्यों लिया गया ये फैसला?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश पर शुरू की गई इस नीति में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरों का उपयोग करके वाहनों की लाइफ की जांच की जानी थी। हालांकि, नॉन-फंक्शनिंग कैमरे, डेटा कलेक्शन में त्रुटि और एनसीआर क्षेत्र में समन्वय की कमी जैसे कारकों ने पूरी फंक्शनलिटी को प्रभावित किया। सिरसा ने कहा कि जब तक उचित प्रणाली स्थापित नहीं हो जाती, तब तक वाहनों को जब्त करना ठीक नहीं है।
62 लाख लोगों को राहत
Vahan डेटा के अनुसार, दिल्ली में 62 लाख से अधिक ईओएल वाहन हैं, जिनमें 41 लाख दोपहिया और 18 लाख फोर-व्हीलर शामिल हैं। इनमें से कई वाहन अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं, भले ही उनका पंजीकरण रद्द हो चुका हो। पॉलिसी के तहत, इन वाहनों को स्क्रैप करना था, लेकिन जनता ने तर्क दिया कि अच्छी तरह से मेंटेन किए गए पुराने वाहन भी कम प्रदूषण फैलाते हैं।
अब ऐसे होगी स्क्रीनिंग
सिरसा ने सुझाव दिया कि नीति को वाहन की उम्र के बजाय जांच को वास्तविक पॉल्यूशन लेवल पर आधारित करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि एनसीआर के अन्य शहरों में ऐसी नीति के अभाव में वाहन मालिक आसानी से पड़ोसी शहरों से ईंधन भरा सकते हैं, जिससे ये पॉलिसी ज्यादा प्रभावी नहीं होगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी नेताओं, जैसे आतिशी और मनीष सिसोदिया ने इस पॉलिसी को "तुगलकी फरमान" करार देते हुए कहा कि यह दिल्लीवासियों को परेशान करने का एक तरीका है। उन्होंने दावा किया कि यह नीति 62 लाख वाहनों को रातोंरात सड़कों से हटा देगी, जिससे श्रमिक वर्ग को भारी असुविधा होगी, जो मुख्य रूप से दोपहिया वाहनों पर निर्भर है।


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