महज 2 घंटे में तय होगा दिल्ली से जयपुर का सफर, नितिन गडकरी की बड़ी घोषणा, जानें प्लान
Electric Cable Highway: केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी आम जनता को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। दिल्ली से जयपुर के बीच का सफर सिर्फ 2 घंटे में पूरा हो जाएगा। वर्तमान में करीब 300 किलोमीटर का सफर करीब 6 घंटे में पूरा होता है।
इससे समय की बचत होगी और सफर की लागत भी करीब 30 फीसदी कम हो जाएगी। नितिन गडकरी ने राजस्थान में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए इस बात की घोषणा की है। दरअसल इन दोनों शहरों के बीच भारत सरकार इलेक्ट्रिक केबल हाईवे बनाने की तैयारी में है।

जिसके बाद दिल्ली से जयपुर के बीच 5 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने लगेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक टोल नाके खत्म करके सैटेलाइट आधारित टोल शुरू करने की बात भी कही जा रही है। नितिन गडकरी ने कहा कि राजस्थान में 2 और ग्रीन फील्ड हाईवे बना रहे हैं।
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी काम चल रहा है, जिसे जनवरी 2024 तक पूरा करने का टारगेट है। अमृतसर से जामनगर के बीच एक्सप्रेस-वे बन रहा, जो 3 रिफाइनरी को जोड़ेगा। अंबाला-कोटपुतली हाईवे बन रहा है।

क्या होता है इलेक्ट्रिक केवल हाईवे: इस हाइवे पर बिजली से चलने वाली गाड़ियां दौड़ती हैं। जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों में हर हाईवे के साथ-साथ एक इलेक्ट्रिक लेन बनी है। यही लेन अब भारत में बन रही है, जो देश की पहली इलेक्ट्रिक लेन होगी।
इसके तहत हाईवे के ऊपर या नीचे बिजली के तार लगाए जाते हैं, जिनकी मदद से हाईवे पर बसें दौड़ाई जाएगी। इलेक्ट्रिक बसें या इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी बार-बार चार्ज करनी होती है।

लेकिन इलेक्ट्रिक हाईवे पर चलने वाली बसों के साथ ऐसा नहीं होगा, क्योंकि उन्हें सीधे बिजली की तारों का कनेक्शन मिल जाएगा। अभी तक यह टेक्निक इंडियन रेलवे इस्तेमाल कर रहा है। आज ट्रेनें दौड़ाने के लिए बिजली की तारों का ही इस्तेमाल किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक बिजली से चलने वाली बसों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इलेक्ट्रिक हाईवे प्रोजेक्ट को बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर योजना के तहत बनाने की प्लानिंग है। टाटा और सिमन्स जैसी कई बड़ी कंपनियां इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखा रही है।

इलेक्ट्रिक हाईवे पर चलने वाली बसें और ट्रक आम इलेक्ट्रिक वाहनों से अलग होंगे। प्रदूषण की नजरिए से भी इलेक्ट्रिक हाइवे पूरी तरह से ईको फ्रेंडली साबित होगा। इलेक्ट्रिक गाड़ियां डीजल-पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होती हैं।


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