दिल्ली में अक्टूबर से बंद हो जाएगी ट्रकों की एंट्री, ये वाहन रहेंगे प्रतिबंध से बाहर
हर साल सर्दियों में होने वाले प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए अब दिल्ली सरकार पहले से ही इससे निपटने की तैयारी में जुट गई है। पहले से ही तैयारी करते हुए दिल्ली सरकार ने अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर बैन लगाने का ऐलान कर दिया है। दिल्ली सरकार ने सर्दियों के महीनों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इस साल अक्टूबर से फरवरी 2023 के बीच ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में लगभग 70,000-80,000 ट्रक हर दिन प्रवेश करते हैं। जिन वाहनों को शहर में अनुमति दी जाएगी उनमें सीएनजी और बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। इसके अलावा सब्जियां, फल, अनाज, अंडे, बर्फ, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों जैसे आवश्यक सामान ले जाने वाले सभी ट्रकों को प्रतिबंध से छूट दी गई है। पेट्रोलियम उत्पादों को ले जाने वाले टैंकर भी प्रतिबंध से बाहर हैं।

आपको बता दें कि हर साल सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता खतरनाक रूप से निम्न स्तर पर पहुंच जाती है। दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने के कारण पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) सबसे खतरनाक स्तर को भी पार कर जाता है। दिल्ली में वायु प्रदूषण के सांस लेने में दिक्कत और फेंफड़े से जुड़ी कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में आज सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 131 दर्ज किया गया जो मध्यम श्रेणी का था। हवा की गुणवत्ता के लिए सीपीसीबी वायु गुणवत्ता सूचकांक जारी करती है जो कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर और कई अन्य तरह की गैसों और प्रदूषण के स्तर को माप कर तैयार किया जाता है।

एक्यूआई इंडेक्स के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 को 'संतोषजनक', 101 और 200 को 'मध्यम', 201 और 300 को 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 को 'गंभीर' माना जाता है।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2016 में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सुनाया था। एनजीटी के दिशानिर्देशों के अनुसार दिल्ली सरकार ने 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली परिवहन विभाग अब ऐसे वाहनों को पीयूसी जारी नहीं कर रहा है।

प्रतिबंधित किए गए पुराने वाहनों को सरकार ने स्क्रैप (कबाड़) घोषित कर दिया है जिससे इन वाहनों की खरीद बिक्री भी नहीं होगी। हालांकि, अब ऐसे वाहनों को स्क्रैप से बचाने के लिए इलेक्ट्रिक में बदला जा सकता है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने कंपनियों को इलेक्ट्रिक व्हीकल रेट्रोफिटिंग किट (EV Retrofitting Kit) बेचने की अनुमति दी है।

पुराने वाहनों को बैन करने के साथ शहर में लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने अगस्त 2020 में राज्यक्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लागू किया था। इस नीति के तहत दिल्ली में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, ऑटोरिक्शा, ई-रिक्शा, और माल गाड़ियों की खरीद पर अधिकतम 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक कार की खरीद पर 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन शुल्क से पूरी तरह मुक्त किया गया है।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। यहां मई में 1.43 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने 7 अगस्त 2019 को इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लॉन्च किया था। इसके तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की खरीद पर 40,000 रुपये, तो वहीं इलेक्ट्रिक कार की खरीद पर 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। जनवरी 2022 में दिल्ली परिवहन विभाग ने 1 लाख से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द किया था।


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